छह सड़का रोड पर बिजली के तारों का मकड़जाल। संवाद
बदायूं। रीवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत तीन साल पहले शहर के अंदर 40 से 50 किमी लंबी विद्युत की लाइनों को बदला जाना था, लेकिन अभी तक यह काम नहीं किया गया। इसके लिए 10 करोड़ रुपये भी जारी हो चुके हैं। इससे फाल्ट की समस्या से जूझना पड़ रहा। हाल यह है कि लटक चुकी लाइनों को लकड़ी के डंडों से बांधकर काम चलाया जा रहा है।
साल 2016 में विद्युत निगम ने शहर में फॉल्ट, चोरी, ट्रिपिंग और लॉस रिडक्शन रोकने के लिए भूमिगत केबल बिछाई थी। इस परियोजना की लागत 119 करोड़ रुपये थी, लेकिन नौ साल बीतने के बावजूद भूमिगत केबल परियोजना पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी। इससे अभी शहर के 25 फीसदी हिस्से में ओवरहेड लाइनों के जरिए विद्युत आपूर्ति की जा रही है। इसके बाद 2022 में आरडीएसएस योजना के तहत शहर की ओवरहेड लाइनों को समाप्त करने की पहल की गई। इसके लिए जिलेभर की विद्युत सुधारात्मक कार्य के लिए 145 करोड़ का टेंडर हुआ।
शहर की विद्युत व्यवस्था को सुधारने के लिए 10 करोड़ से जर्जर व ओवरहेड लाइनों को बदलने का काम तो शुरू कराया, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता व कार्यदायी संस्था की लापरवाही के चलते कार्य में प्रगति नहीं हो सकी। नतीजतन 2014 में पड़ी लाइनों के सहारे ही 25 फीसदी उपभोक्ताओं के घरों की विद्युत आपूर्ति की जा रही है।
- आरडीएसएस योजना के तहत शहर की ओवरहेड लाइनों को बदले जाने का कार्य होना था, लेकिन भूमिगत केबल की लाइन अभी पूरी तरह से शहर में शुरू नहीं हो सकी है। कुछ स्थानों पर पैनल बॉक्स बंद हैं। ओवरहेड लाइनों को हटाने की कार्ययोजना तैयारी की जा रही है। जल्द ही शहरवासियों को इस समस्या से निजात मिलेगी। - अखिलेश कुमार, अधीक्षण अभियंता