प्रशासन की ओर से नहीं मिली राहत
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से कोई राहत नहीं मिल रही है और न ही कोई राहत शिविर लगाया गया है। ऐसे में सड़क किनारे खुले में रहना मजबूरी बनती जा रही है। गंगा नदी रोज कटान कर रही है। खेतिहर भूमि गंगा में समाती जा रही है। अब तक तीन सौ बीघा से ज्यादा कृषि भूमि गंगा में समा गई।
ग्रामीण बोले- हमारी पीड़ा कोई नहीं समझ रहा
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कोई भी उनकी पीड़ा समझने को तैयार नहीं है। न जनप्रतिनिधि स्थिति देखने आ रहे हैं और न ही प्रशासन सुध ले रहा है। बाढ़ खंड़, प्रशासन के अधिकारी कई बार आए लेकिन गांव को बचाने की कोई पैरवी नहीं हुई है। गांव के लोग दहशत के बीच रहने को मजबूर हैं।