अबतक प्रिया साफ्टवेयर पर ही पंचायत निधि के ब्योरा रहते थे। इनमें कुछ कठिनाइयां आईं तो इसके लिए दो और साफ्टवेयर तैयार किए गए हैं। प्रिया साफ्टवेयर में परिसीमन से पूर्व की 885 ग्राम पंचायतों को संबंद्ध किया गया था। इनमें 555 ग्राम पंचायतें ही अपना काम निपटा सकीं थीं। बाकी की ग्राम पंचायतों को अब धन नहीं मिलेगा। जबतक वह प्रिया साफ्टवेयर में अपने अभिलेख लोड न कर लें।
अब 1038 ग्राम पंचायतें हैं। इन सभी को ई-पंचायत की नई व्यवस्था में अप्रैल तक बंध जाना होगा। इसके लिए प्रांतीय स्तर से कार्यक्रम तय हो गए हैं। हालांकि अभी 221 ग्राम पंचायतों की पहली बैठक नहीं हो सकी है। हाल ही में एक प्रधान का ऊस्वर्गवास हो गया है। इस प्रकार 222 ग्राम पंचायतों को निकाल दें तो बाकी की ग्राम पंचायतें अस्तित्व में आ चुकी हैं। इनके लिए पहले तीन साफ्टवेयर लागू हो जाएंगे। बकाया सभी ग्राम पंचायतों को इसमें बंधना होगा। तभी ग्राम निधि का संचालन ग्राम पंचायतें कर सकेंगी।
ऐसे होगा तीन साफ्टवेयर में काम
कार्ययोजना बनाने के लिए प्लान प्लस साफ्टवेयर का प्रयोग होगा। इसके बाद उस पर काम करने के लिए एक्शन साफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाएगा और काम की पूर्ति के बाद प्रिया साफ्टवेयर ीमें पूरा आर्थिक ब्योरा आदि दिया जाएगा। ग्राम निधि में केंद्रीय वित्त, राज्य वित्त, मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन आदि की धनराशि का इन साफ्टवेयर में फीडिंग के साथ ही काम होगा।
एक वर्षीय योजना का बनेगा प्रारूप
अबतक पंच वर्षीय योजना के तहत काम हो रहा था। नई व्यवस्था में पंच वर्षीय के साथ ही एक वर्षीय योजना के तहत साफ्ट वेयर में फीडिंग होगी।
ग्राम पंचायतों को ई-पंचायत में बदलने के लिए डीपीएम सचिन देव को जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी हैं। जल्दी ही प्रशिक्षण के कार्यक्रम तय किए जाएंगे। अप्रैल तक फीडिंग का कार्य पूरा करने के हर संभव प्रयास होंगे।
- राजेश यादव, जिला पंचायतराज अधिकारी