ऐसे खुला मामला
साल 2009 से लेकर 2017 तक बैंक में घपला चलता रहा, लेकिन बैंक प्रबंधन और विद्युत निगम को इसकी भनक नहीं लगी। जब विद्युत उपभोक्ताओं पर बकायेदारी के चलते कनेक्शन काटने व आरसी जारी करने की कार्रवाई की गई, तब जाकर मामला खुला। इस मामले में बैंक अधिकारियों की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसके बाद शासन के आदेश पर ईओडब्ल्यू को जांच सौंपी गई। ईओडब्ल्यू ने जांच में 14 आरोपियों को दोषी बनाया। तब से ईओडब्ल्यू संजय की तलाश में थी। सोमवार को टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
सात पर लिखा गया मुकदमा
पुलिस के मुकदमे में उस समय मास्टमाइंड संजय, मां वीरबाला, पिता भोले नाथ, भाई संदीप कुमार, अजीत कुमार, एक अन्य भाई सुजीत की पत्नी बबीता और चंद्रपाल को नामजद किया था। बाद में ईओडब्ल्यू की जांच में सात और आरोपी प्रकाश में आए।