बदायूं। अभिगांव और ब्यौर की गोशाला में गोवंशों की मौत का मामला सामने आने के बाद पशुपालन विभाग में तैनात रहा बाबू चर्चा में है। कई सालों से बाबू पशुपालन विभाग बरेली में मूल तैनाती होने के बावजूद यहां बदायूं में अटैच रहा। बाबू के कारनामे का भंडाफोड़ होने से पहले अधिकारियों ने बिना कार्रवाई उसे 15 दिन पहले ही बदायूं से रिलीव कर बरेली भेज दिया था।
विभाग में चर्चा है कि बाबू के जरिये ही एनजीओ को गोशालाएं देने की कहानी लिखी गई। दानवीर जनकल्याण समिति को 11 गोशालाओं के संचालन की जिम्मेदारी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका बाबू की ही बताई जा रही है। एनजीओ संचालक दानवीर यादव ने अन्य जानने वालों के नाम पर एनजीओ बनाकर खुद ही गोशालाओं का संचालन शुरू किया था।
बाबू की मूल तैनाती बरेली में होने के बाद भी सांठगांठ कर वह लंबे समय बदायूं में टिका रहा। जब अधिकारियों को उसकी करतूतों की भनक लगी तो अपनी गर्दन बचाने के लिए उसे रिलीव कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, बाबू पूर्व में तैनात रहे एक मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी का ज्यादा मुंह लगा था। बताते हैं कि घटना से दो दिन पहले विकास भवन में बाबू को देखा गया था।
बाबू को 15 दिन ही पहले रिलीव कर बरेली भेज दिया गया था। विकास भवन क्यों आया, इसकी जानकारी नहीं है। - डॉ. प्रेम सिंह, सीवीओ