बदायूं। भीषण गर्मी के बीच शहर से लेकर देहात और गांव तक लोग मुखर हो रहे हैं। हालांकि, इन दिनों मुख्यालय पर बिजली सप्लाई की स्थिति में कुछ सुधार है वहीं दूसरी ओर तहसील मुख्यालयों से लेकर गांवों तक बुरा हाल है। दातागंज, सहसवान, बिसौली और बिल्सी तहसीलों और ब्लॉकों से लगातार अंधाधुंध कटौती की खबरें आ रही हैं। धरना प्रदर्शन के साथ बिजली उपकेंद्रों के घेराव तक हो रहे हैं। बिजली कटौती, ट्रिपिंग और लो वोल्टेज का प्रमुख कारण पुराने बिजली उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि और नए का निर्माण लटकना है।
जिले में तमाम बिजली उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि लंबे समय से नहीं हुई है। इस दौरान भार लगातार बढ़ रहा है। गांवों में लगे ट्रांसफार्मरों के फुंकने और फटने का कारण भी क्षमता से अधिक भार का होना है। इसके साथ नए बिजली उपकेंद्रों का निर्माण भी नहीं हो पा रहा है। शहर में ही बिजली उपकेंद्रों पर बढ़ रहे लोड को कम करने के लिए चार नए उपकेंद्र बनाए जाने हैं। इनका काम शुरू नहीं हो सका है।
इसके अलावा आवास विकास कार्यशाला 33/11 केवीए उपकेंद्र की क्षमता वृद्धि भी लटकी है। आवास विकास कार्यशाला स्थित 33/11 केवीए के उपकेंद्र से जजी, ऑफीसर्स कॉलोनी, बाबा कॉलोनी, इंदिरा नगर, मंडी समिति, राजनगर, गन्ना दफ्तर, न्यू कृष्णा नगर, बालाजी नगर, बीआईएमटी, महर्षि स्कूल आदि इलाकों में बिजली सप्लाई होती है। यहां से तीन प्रमुख फीडर निकलते हैं। उपकेंद्र की क्षमता पांच से बढ़ाकर 10 एमवीए की जानी है। यह काम लटका हुआ है। पुराने पैनल और रिले सिस्टम के साथ जुगाड़ से यह उपकेंद्र अब भी चल रहा है।
इसके साथ ही शहर में सप्लाई देने वाले उपकेंद्रों का भार कम करने के लिए चार नए उपकेंद्र भी बनाए जाने हैं। इन उपकेंद्रों के लिए छोटी ज्यारत, राजकीय मेडिकल कॉलेज, दातागंज तिराहा और नरऊ खुर्द के आसपास जमीन तलाशने का काम ही पूरा नहीं हो सका है। चार नए उपकेंद्र बनने से शहर में पनबड़िया, ढाक वाली ज्यारत, मीरा सराय और मीरा जी चौकी उपकेंद्रों का भार कम होगा। शहर में ओवरलोडिंग की समस्या नहीं रहेगी।
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33 केवीए अतिरिक्त लाइन का भी होना है काम
शहर में 33 केवीए की अतिरिक्त लाइन का काम भी होना है। दरअसल, अब तक एक ही लाइन है। ऐसे में अगर किसी उपकेंद्र या अन्य स्थान पर फाल्ट होता है तो 33 केवीए की लाइन पर शटडाउन लेना होता है। ऐसे में पूरे शहर ही बिजली गुल हो जाती है। शहर को सप्लाई देने वाले सभी उपकेंद्र ओवरलोड हैं। चार नए उपकेंद्र और 33 केवीए की लाइन का काम पूरा होने के बाद शहर में कटौती, ट्रिपिंग और ओवर लोडिंग की समस्या लगभग खत्म हो जाएगी, लेकिन यह काम शुरू ही नहीं हो पा रहे।
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शहर में लगभग सभी बिजली उपकेंद्रों पर ओवरलोडिंग की समस्या है। शहर के लिए चार नए उपकेंद्र प्रस्तावित हैं। इनके लिए भूमि की तलाश की जा रही है। उपकेंद्र और 33 केवीए लाइन का काम पूरा होने के बाद ओवरलोडिंग, ट्रिपिंग और लो वोल्टेज की समस्या लगभग खत्म हो जाएगी।
-प्रवेश कुमार, एक्सईएन विद्युत वितरण खंड