शुक्रवार रात और शनिवार को पूरे दिन रुक-रुक कर हुई बूंदाबांदी ने किसानों के चेहरे पर रौनक लौटा दी है। फायदे में हालांकि सब्जी फसलें भी हैं, लेकिन वेल पकने के साथ खुदाई को तैयार आलू को आंशिक नुकसान की आशंका सताने लगी है। गेहूं उत्पादकों की तो बल्ले-बल्ले हो गई है।
मौसम का मिजाज अभी बूंदाबांदी होते रहने का संकेत दे रहा है लेकिन संजीवनी बनी हल्की बारिश ने सबसे ज्यादा फायदा गेहूं की फसल को पहुंचाया है। कल्ले फूटने ओर बढ़वार के दिनों में नमी से वंचित गेहूं की फसल को तापमान में गिरावट की आवश्यकता बनी हुई थी। बूंदाबांदी ने उसे पूरा करने का काम कर दिया। आलू की फसल पर गौर करें तो उसे कोई खास नुकसान नहीं है लेकिन अगर बरसात अधिक हुई तो पानी भरते ही आलू के सड़ने की आशंका बढ़ जाएगी। बता दें कि आठ-नौ दिनों में तापमान में तेजी से बढोतरी हुई थी। उससे गेहूं की फसल उकलाने लगी थी। कृषि वैज्ञानिक भी बूंदाबांदी को फसलों के लिए फायदेमंद करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि लौकी, तोरई, बैगन और कद्दू की फसल भी अच्छा उत्पादन देगी। सब्जी फसलों में कीटों का प्रकोप भी कम हो जाएगा।
बरसात ने धुली सरसों और गेहूं पर से मांहू
पिछले दिनों तापमान बढ़ने की वजह से गेहूं और सरसों की फसल को मांहू कीट ने चपेट में लेना शुरू कर दिया था। अगेती गेहूं की बालियों और सरसों की फली पर मांहू ने बसेरा बनाया ही था कि अचानक बूंदाबांदी होने से मांहू धुल गई। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अर्जुन सिंह ने बताया कि अब गेहूं और सरसों पर मांहू फिर से अटैक नहीं कर पाएगी।
हल्की बरसात से फसलों को काफी फायदा हो गया है। खेतों में नमी लौट आई है। गेहूं के पकने से पहले जिभ तरह का मौसम चाहिए, वह नजर आने लगा है। आलू के फसल में अगर बरसात का पानी भरने लगे तो उसे समय रहते बाहर निकालने की व्यवस्था कर दी जाए। खेतों में पानी भरने पर ही पका आलू सड़ने के कगार पर पहुंचेगा।- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक।