सैदपुर। नगर पंचायत कार्यालय में अधिशासी अधिकारी की लगातार गैरहाजिरी से कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो गया है। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, प्रधानमंत्री आवास योजना, फुटपाथ वेंडर, मुद्रा ऋण और राशन कार्ड जैसी सैकड़ों फाइलें अधर में लटकी हैं। दफ्तर का चक्कर लगाने वाले नगरवासी मायूस होकर लौट रहे हैं।
करीब पांच माह पहले ईओ अखिलेश कुमार दीक्षित के स्थानांतरण के बाद नगर पंचायत का अतिरिक्त कार्यभार त्रिवेंद्र कुमार को दिया था लेकिन उनकी मूल तैनाती अलापुर नगर पंचायत में है। सूत्रों के अनुसार उसहैत का चार्ज भी पहले उनके पास रहा है। इसके बावजूद त्रिवेंद्र कुमार ने सैदपुर कार्यालय में एक सप्ताह भी नियमित रूप से समय नहीं दिया। जब भी शासन को रिपोर्ट भेजनी होती है तो वे कर्मचारियों को जिला मुख्यालय बुला लेते हैं। उनका न तो कोई तय कार्यालय समय है और न ही वे फोन रिसीव करते हैं।
इस उदासीनता के चलते नगर के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। हाल ही में बनी आधा दर्जन इंटरलॉकिंग सड़कों की हालत पहली ही बारिश में धंसकर खराब हो गई लेकिन ईओ ने निरीक्षण तक नहीं किया। सफाई व्यवस्था भी चरमरा गई है। कुछ समय पूर्व पचपेड़ा तालाब में 15 वर्षीय किशोर हसन बशीर की मौत हो गई थी। नगर पंचायत ने करीब 40 लाख रुपये खर्च कर तालाब का सुंदरीकरण कराया था, मगर सुरक्षा मानकों की अनदेखी इस हादसे का कारण बनी। इसी तरह एक पशु का शव पांच दिन तक हाईवे पर पड़ा रहा लेकिन नगर पंचायत ने संज्ञान नहीं लिया। शिकायतें बार-बार दर्ज कराईं लेकिन ईओ तक पहुंच नहीं सकीं। नगरवासियों का कहना है कि अब कार्यालय कर्मचारियों के भरोसे ही चल रहा है। ईओ की लापरवाही ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है और जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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इस मामले पर नगर पंचायत अध्यक्ष इशरत अली खान ने बताया कि ईओ के नियमित रूप से न आने की मुख्य वजह एक साथ तीन नगर पंचायतों का चार्ज और जिला स्तर पर लगातार बैठकें हैं। उन्होंने दावा किया कि ईओ की गैरहाजिरी से कोई काम लंबित नहीं है। जहां भी आवश्यकता होती है, फोन पर कार्य निपटा लिया जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जनता से नियमित मुलाकात का कोई निश्चित दिन तय नहीं है।