बिल्सी रोड पर बनाया गया टेस्टिंग ट्रैक। संवाद
बदायूं। जिले में बढ़ते हादसों में कमी लाने के उद्देश्य से टेस्टिंग ट्रैक बनाया जा रहा है। ट्रैक सितंबर माह से शुरू होगा। इसके बाद ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए समय व पैसा दोनों ही अधिक देने होंगे। इससे हादसों में कमी आएगी।
लाइसेंस बनवाने के लिए अब ट्रैक पर टेस्ट देना होगा। यह व्यवस्था सितंबर माह के पहले सप्ताह में शुरू हो जाएगी। अभ्यर्थी को टेस्ट देने से पहले निर्धारित फीस जमा करनी होगी। फीस जमा होने के बाद 29 दिनों तक लाइसेंस बनवाने वाले व्यक्ति को हर रोज एक घंटे वाहन चलाने के लिए ट्रैक पर ट्रेनिंग दी जाएगी। 29 दिन बाद उसको प्रमाण पत्र जारी होगा और आधार पर लाइसेंस जारी होगा। अब लाइसेंस के लिए एक माह का समय लगेगा।
हर माह 40 से 50 लोगों की हादसों में चली जाती है जान
-हादसों के मामले में जिला का प्रदेश में 18वां स्थान है। यहां हर माह 40 से 50 लोगों की सड़क हादसों में जान जाती है। इसका मुख्य कारण यातायात नियमों का पालन न करना। जिले में हर माह सैकड़ों लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं लेकिन चालक प्रशिक्षित नहीं है। इसलिए हादसे बढ़ते जा रहे हैं। अब ट्रेनिंग के बाद लाइसेंस जारी होंगे तो हादसों में कमी आएगी।
बढ़ जाएगा खर्चा
-लाइसेंस बनवाने में अब खर्चा दोगुना हो जाएगा। अब तक करीब चार हजार रुपये में लाइसेंस बन जाता था लेकिन अब सात से आठ हजार रुपये खर्च करने होंगे।
नहीं चलेगा जुगाड़
लाइसेंस बनवाने के लिए लोग नेताओं से फोन कराके आसानी से बिना टेस्ट लाइसेंस जारी करवा लेते थे। सितंबर से जुगाड़ खत्म हो जाएगा। अब ट्रैक पर वाहन चलाने वालों का ही लाइसेंस जारी किया जाएगा।
कोट,
- ट्रैक की व्यवस्था अब तक जिले में नहीं थी। सितंबर से ट्रैक शुरू होना वाला है। ट्रैक पर टेस्ट पास करने वालों का ही लाइसेंस बनेगा। इसके लिए निर्धारित फीस भी अभ्यर्थी को जमा करनी होगी। - रामबचन गुप्ता, एआरटीओ प्रशासन