प्रदेशभर में अपने भविष्य के लिए चिंतित जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए)के कर्मचारी अपने समायोजन के लिए लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं, इसी बीच हाईकोर्ट के एक आदेश पर उन्हें ग्रेच्युटी मिलने का प्रावधान हो गया है। इससे उनमें खुशी की लहर दौड़ गई है।
इस संबंध में विभाग के प्रमुख सचिव दीपक त्रिवेदी का पत्र भी जिलों को जारी हो गया है। मऊ डीआरडीए से सेवा निवृत्त लेखाकार योगेंद्र नाथ सिंह ने ग्रेच्युटी भुगतान के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका डाली थी। इस याचिका पर डबल बैंच की सुनवाई और नंद किशोर चौरसिया बनाम राज्य एवं अन्य के मामले में पारित आदेश के संदर्भ में इन कर्मियों के लिए ग्रेच्युटी का रास्ता साफ हो गया है।
प्रमुख सचिव ने अपने पत्र में सेवा निवृत्त कर्मियों के लिए पारित आदेश के सम्मान में ग्रेच्युटी दिए जाने का शासनादेश भी जारी किया है। जिले में परियोजना निदेशक डीआरडीए को भी शासनादेश भेज दिए गए हैं।
प्रदेशभर में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे डीआरडीए के कर्मचारी अपने को समायोजित करने की मांग को लेकर लखनऊ और दिल्ली तक की लड़ाई लड़ चुके हैं। उनकी यह लड़ाई अभी भी जारी है। इस बीच रिटायरमेंट वाले कर्मचारियों के लिए हाईकोर्ट द्वारा ग्रेच्युटी दिए जाने का आदेश उनके लिए संबल बना है।
इस संबंध में शासनादेश प्राप्त हो गया है। शासनादेश का सम्मान किया जाएगा। शासनादेश को विस्तार से समझने के बाद उसे अनुपालन में लाया जाएगा।
- आरपी सिंह, पीडी, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण