-डीपीआरओ डॉ. प्रीतम 12 अप्रैल से मेडिकल लीव पर, उनका चार्ज आज होगा
मेडिकल लीव पर गए डीपीआरओ डॉ. प्रीतम सिंह का चार्ज अब किसी को देने की तैयारी की गई है ताकि जल्द से जल्द जिले को मिला ओडीएफ का लक्ष्य पूरा हो सके। पंचायत राज विभाग के आंकड़ों को ही मानें तो अब भी गंगा किनारे के 19 गांवों को ओडीएफ किया जाना बाकी है। इसको लेकर शासन का काफी समय से अफसरों पर दबाव था। इसी दबाव के बीच डीपीआरओ डॉ. प्रीतम सिंह नौ अप्रैल से मेडिकल लीव पर चले गए। उनकी वापसी कब होगी, स्थिति साफ नहीं है। वैसे भी यह अफसरों के तबादलों का सीजन है। डीपीआरओ के मेडिकल लीव पर जाने के बाद से पंचायत राज विभाग के अहम कामकाज ठप पड़े हुए थे। उन्होंने अपना चार्ज किसी को नहीं दिया है और जिले में एडीपीआरओ का पद भी खाली चल रहा है।
मंगलवार को शासन से बाकी गांवों को जल्द से जल्द ओडीएफ करने का फरमान आया तो सीडीओ अच्छे लाल यादव ने खाली पड़े डीपीआरओ का चार्ज किसी को देने का मन बना लिया। हालांकि अभी साफ नहीं है कि चार्ज किसको दिया जाएगा लेकिन गांवों को ओडीएफ किए जाने के शासन के प्राथमिकता वाले कार्य को पूरा कराने के लिए संभव है कि बुधवार को सीडीओ किसी अन्य अधिकारी को डीपीआरओ का चार्ज दे दें। वहीं, चर्चा यह भी है कि शासन से जल्द ही जिले में नए डीपीआरओ की तैनाती की जाना संभव है। बता दें कि गंगा केे किनारे के गांवों को खुले में शौच मुक्त करने के लिए पिछले वित्तीय वर्ष में 14996 शौचालय बनाने का लक्ष्य आया था। इनका निर्माण 31 मार्च तक पंचायत राज विभाग को कराना था लेकिन अब तक शौचालयों का निर्माण नहीं हो सका। नतीजतन वित्तीय वर्ष खत्म हुए लगभग डेढ़ माह चुका है फिर भी लगभग डेढ़ हजार शौचालय बनने बाकी हैं। ऐसे में, सवाल उठता है कि पंचायत विभाग गंगा के किनारे के गांवों को कब तक खुले में शौच मुक्त करा पाएगा? वहीं शासन की ओर से ओडीएफ करने की तारीख बढ़ गई है। 67 गांवों को ओडीएफ करने के लक्ष्य के मुकाबले अब तक कागजों में 48 गांव ही ओडीएफ हो पाए हैं। सीडीओ अच्छे लाल सिंह यादव का कहना है कि डीपीआरओ मेडिकल लीव पर है इसके बावजूद भी लगातार ओडीएफ के लिए कार्य किया जा रहा है। दो तीन दिन में बचे हुए शौचालय का निर्माण करा दिया जाएगा। डीपीआरओ के चार्ज के लिए भी फाइल तैयार की गई है जल्द ही किसी को डीपीआरओ का चार्ज हो जाएगा।