-डिमांड के अनुरूप नहीं मिल पा रहे एंटी रैबीज इंजेक्शन
-सप्ताह में करीब सौ डोज की है आवश्यकता
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को डिमांड के अनुरूप एंटी रैबीज के इंजेक्शन नहीं मिलने से कुत्ता काटे के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति कई महीनों से बनी हुई है। महीने में सौ के मुकाबले 50 फीसदी इंजेक्शन भी नहीं मिल पा रहे हैं।
कुत्ता काटे के मरीजों की संख्या में इजाफा हालांकि सर्द मौसम के अनुरूप नहीं हुआ है लेकिन इन दिनों जितने मरीज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आ रहे हैं, उससे साफ है कि नगर समेत आसपास इलाके में आवारा कुत्तों का आतंक बरकरार है। इस सप्ताह करीब 40 नए पर्चे बने। पिछले पर्चों पर लगाए जा रहे एंटी रैबीज के इंजेक्शन की संख्या पर गौर करें तो कुत्ता काटने के मामलों की संख्या सौ पार हो गई, पर सप्ताह भर में करीब 50 मरीजों की ही इंजेक्शन मिल पाए। इंजेक्शन के अभाव में लौट रहे मरीजों के तीमारदारों में नझियाई मोहल्ले के प्रदीप ने बताया कि आठ साल के बच्चे को कुत्ते ने काट लिया था। अस्पताल में पहुंचे तब तक इंजेक्शन खत्म हो चुके थे। उन्हें बाहर खरीदकर इंजेक्शन लगवाना पड़ा।
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बंदर के हमले में घायलों को भी एंटी रैबीज की जरूरत
उझानी। ऐसा नहीं कि एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगवाने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचने वाले मरीजों में सभी कुत्तों के शिकार होते हैं। कई बंदरों के काटने के कारण भी अस्पताल पहुंचते हैं।
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एंटी रैबीज के इंजेक्शन के लिए जिला मुख्यालय डिमांड भेजी जाती है। एक दिन में पांच से ज्यादा इंजेक्शन नहीं मिल पाते। जबकि मरीजों की संख्या अधिक रहती है। प्रतिदिन 10 इंजेक्शन की आवश्यकता पड़ती है।
-डॉ. महेंद्र बहादुर सिंह, चिकित्साधीक्षक