फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अपने जीवन काल में ज्यादा से ज्यादा करें पुण्य कर्म : संत प्रज्ञानंद सागर

विज्ञापन
बिल्सी में प्रवचन देते जैन मुनि उपाध्याय प्रज्ञानंद सागर। संवाद
विज्ञापन
बिल्सी। जैन समुदाय के संत रत्न आचार्य वसुनंदी महाराज के शिष्य उपाध्याय प्रज्ञानंद मुनिराज का नगर में प्रवेश पर ढोल-नगाड़ों से स्वागत किया गया। इसके बाद समस्त धार्मिक आयोजन चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में सम्पन्न कराए गए।
विज्ञापन

उपाध्याय मुनि प्रज्ञानंद सागर मुनिराज ने कहा कि आंख खुली तो सपना गया, आंख मुंदी तो अपना गया, दो दिन का मेहमान यहां, सांस रुकी तो दफनाया और जलाया गया। इसलिए जीवन में कोई भी कार्य करो तो वह जीवन का अंतिम कार्य है, ऐसा मानकर करो। इससे जीवन में कभी दुख नहीं पाओगे।
उन्होंने कहा की मृत्यु ही जीवन का सत्य है। जीवन के किस मोड़ पर किस क्षण में मृत्यु मनुष्य को प्राप्त हो जाए यह किसी को पता नहीं होता, इसलिए लोगों को चाहिए कि अपने जीवन काल में ज्यादा से ज्यादा पुण्य व शुभ कर्म करें। इससे अगले भव में उनकी अनुभूति हो सके। इस मौके पर जैन समाज के अध्यक्ष मृगांक कुमार जैन, प्रशांत कुमार जैन, नीरज जैन, अनिल जैन, आशीष जैन, अभिषेक जैन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें