महीना के पहले और तृतीय शनिवार को होने वाले समाधान दिवस में खासकर लेखपालों के गायब रहने की असलियत उस वक्त सामने आ गई जब डीएम और एसएसपी अचानक ही कोतवाली आ धमके। उन्हें महज तीन-चार लेखपाल ही मिले। करीब 20 लेखपाल बिना किसी कारण बताए गायब थे। गैरहाजिर लेखपालों के बारे में सच्चाई का पता लगाने के लिए डीएम ने उनके नाम और सेलफोन नंबरों की लिस्ट तलब कर ली है।
कोतवाली परिसर में समाधान दिवस के तहत शनिवार पूर्वाह्न तक सब कुछ सामान्य रहा था। डीएम शंभूनाथ और एसएसपी सौमित्र यादव अचानक जब कोतवाली पहुंचे, तो उन्हें फरियादियों को छोड़िए, ज्यादातर लेखपाल भी नजर नहीं आए। जो तीन-चार लेखपाल मिले, उनसे गायब लेखपालों के बारे में पूछा गया। हालांकि साथियों ने खासकर आपदा मुआवजा के सिलसिले में फील्ड में बताकर गायब लेखपालों की पैरोकारी शुरू कर दी, लेकिन इससे डीएम खफा हो गए।
डीएम ने दिवस कार्यक्रम में मौजूद मिले लेखपाल ओमबाबू नागेंद्र, चरनसिंह और वीरेंद्र सिंह से उनके गायब साथियों को फोन कराके उनकी लोकेशन का पता कराया। बाद में डीएम ने गायब लेखपालों के नाम और सेलफोन नंबरों की लिस्ट भी हासिल कर ली। डीएम ने हालांकि गायब लेखपालों में से किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं है, लेकिन वह सेलफोन नंबरों से समाधान दिवस वाले दिन उनकी लोकेशन की सच्चाई का पता करवाएंगे। ऐसे में काफी हद तक संभव है कि सात-आठ लेखपाल फर्जी लोेकेशन बताने की वजह फंस भी सकते हैं।
सुनने वाला कोई नहीं
उझानी। आपदा मुआवजा के चेक, गेहूं खरीद में मनमानी और जमीन-जायदाद के विवादों से जुडे मौजूदा माहौल में किसी भी फरियादी के समाधान दिवस में नहीं पहुंचने से तमाम तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। राजस्व और पुलिस कर्मी भले ही सबकुछ ठीक-ठाक कह रहे हैं, लेकिन वजह दूसरी भी हो सकती है। काफी हद तक संभव है कि लोगों के मन में यह भावना घर कर बैठी हो कि जब सुनने वाले ही नहीं पहुंचते, तो चक्कर काटना बेकार है।