-सीएमओ और अन्य अधिकारियों को दी कड़ी हिदायत
-जननी सुरक्षा योजना में प्रसूताओं को तत्काल भुगतान के निर्देश दिए
स्वास्थ्य विभाग के अफसर अब भी चुनावी सरूर उतार नहीं पाए हैं। स्थिति यह है कि वित्तीय वर्ष खत्म होने में 10-12 दिन ही बाकी हैं लेकिन उनको अपने विभागीय योजनाओं की प्रगति तक की जानकारी नहीं है। डीएम ने शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की तो अधिकारी अपने साथ पटल बाबुओं को ले आए और खुद डीएम को जानकारी देने के बजाय लिपिकों से जवाब देने को कहने लगे। इस पर डीएम पवन कुमार को गुस्सा आ गया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को इसके लिए निलंबन के लिए शासन तक को लिखने की हिदायत दे डाली।
शनिवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में डीएम ने स्वास्थ्य विभाग से संबंधित योजनाओं की समीक्षा की तो विभिन्न योजनाओं के नोडल अधिकारी, एसीएमओ डीएम को योजना के संबंध में कोई भी संतोषजनकर जानकारी नहीं दे सके, साथ लाए बाबुओं की ओर इशारा करते हुए जानकारी उपलब्ध कराने को कहा। इस पर डीएम को गुस्सा आ गया। उन्होंने सीएमओ और एसीएमओ से नाराजगी जाहिर की। निर्देश दिए कि भविष्य में कोई भी बाबू उनकी बैठक में नहीं आएगा, जिस योजना के संबंध में पूछा जाएगा, वही नोडल अधिकारी उसकी जानकारी देगा, अन्यथा निलंबन के लिए शासन को लिख दिया जाएगा। बैठक में जननी सुरक्षा योजना में प्रसूताओं का भुगतान लंबित पाए जाने पर डीएम ने सीएमओ को कड़ी हिदायत दी। कहा कि किसी लाभार्थी का भुगतान शेष रहा तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस के अनुपस्थित होने पर डीएम ने जवाब तलब करने के साथ ही एक दिन का वेतन काटने का भी निर्देश दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को हिदायत दी कि 31 मार्च से पूर्व विभिन्न योजनाओं का शतप्रतिशत लक्ष्य प्रत्येक दशा में पूरा हो जाना चाहिए अन्यथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।