बदायूं। समूह की दो महिलाओं ने महिला अस्पताल की कैंटीन पर अपना-अपना हक जताते हुए पिछले चार दिन से ताला जड़ रखा है। ऐसे में जहां प्रसूताओं के लिए शुरू की गई जननी सुरक्षा योजना फेल साबित हो रही है, वहीं अस्पताल में भर्ती 40 महिलाएं बिना नाश्ता और भोजन के परेशान हो रहीं हैं। शुक्रवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं से जब बातचीत की उनकी परेशानी खुलकर जुबां पर आ गई।
प्रसूताओं को सुबह नाश्ते के अलावा भोजन देने की व्यवस्था समूह की महिला को दी गई है। महिला अस्पताल में प्रसूता कादरचौक थाना क्षेत्र की इस्माइलपुर निवासी कबिता ने बताया कि तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रहे। प्रसव होने के बाद आज छुट्टी हो रही है। एक भी दिन भोजन नहीं मिल सका। घर से नाश्ता और खाना मंगाकर खाया है।
रसूला की रहने वाली आरती ने बताया कि वह दो दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। बृहस्पतिवार को उनको बच्चा हुआ है। भोजन नहीं मिला है। दूध की दस रुपये की थैली थमा कर कर्मचारी चला गया। प्रसूता को मिलने वाला दलिया व पौष्टिक आहार नहीं मिल रहा है।
गुराई से आई अंगूरी देवी ने बताया कि बृहस्पतिवार की शाम को ही भर्ती हुईं हैं। सुबह उनको बच्चा पैदा हुआ है। शाम को खाना नहीं मिला। प्रसव के पहले या प्रसव के बाद, प्रसव केंद्र की ओर से कोई नाश्ता या भोजन उपलब्ध नहीं कराया गया।
मर्रई की रहने वाली किरन ने बताया कि एक बार दाल-रोटी मिली है। नाश्ते में कुछ भी नहीं मिला है। प्रसूताओं को दलिया, दूध व फल नहीं मिल रहा है। कोई मांगता है तो उसको दस रुपये वाली दूध की थैली पकड़ा दी जाती है। बाहर गर्म कराने के 20 रुपये देने होते हैं।
शाम को नहीं मिला खाना तो होटल से मंगाकर खाया
प्रसव पीड़ा होने पर पुत्रवधू को महिला अस्पताल में बृहस्पतिवार को भर्ती कराया गया। शाम को खाना नहीं मिला तो होटल से मंगाकर खाना खाया। सुबह से न नाश्ता मिला न ही भोजन। नाश्ता-भोजन अस्पताल की ओर से नहीं मिला है। -प्रीति, कटिन्ना बरचऊ
दस का दूध, गर्म करवाने पर खर्च हो रहे 20 रुपये
अस्पताल के खाने का इंतजार करते रहे तो मरीज और तीमारदार दोनों को ही भूखा मर जाना पड़ेगा। तीन दिन से घर से खाना मंगाकर खा रहे हैं। अस्पताल वाले दस रुपये की दूध की थैली पकड़ा दे रहे हैं, जिसे गर्म करवाने में 20 रुपये खर्च हो रहे हैं। - खुशबू, कटरा ब्राह्मपुर शहर कोतवाली
निर्धारित मेन्यू
नाश्ता- सुबह सात से आठ बजे - एक गिलास दूध के साथ दो अंडे, दलिया, ब्रेड चार स्लाइस व 10 ग्राम मक्खन।
भोजन- दोपहर एक से दो बजे - चार रोटी, दाल, मौसमी सब्जी, चावल व सलाद, दही
भोजन- शाम सात से साढ़े आठ- चार रोटी, मौसमी सब्जी, चावल व मौसमी फल (सेब, संतरा, केला आदि) एक गिलास दूध।
यह है विवाद
जिले के सभी अस्पतालों में समूह की महिलाओं को कैंटीन के टेंडर किए गए हैं। समूह की जिस महिला को सभी सदस्यों ने चुनकर प्रस्ताव किया वही कैंटीन का संचालन करती आ रहीं हैं। महिला अस्पताल में संचालित कैंटीन का टेंडर मार्च 2026 तक के लिए गड्डी देवी के नाम है। इसी समूह की एक अन्य महिला ने दूसरा प्रस्ताव करके खंड विकास अधिकारी को सौंप दिया है। खंड विकास अधिकारी ने उसको समूह कार्यालय को भेज दिया। यही वजह है कि चार दिन से विवाद के चलते कैंटीन बंद है।
बिना शिकायत दूसरी महिला ने कैसे कर दिया दूसरा प्रस्ताव
कैंटीन के संचालन के संबंध में कोई शिकायत नहीं थी, ऐसे में समूह की महिलाओं ने दूसरा प्रस्ताव कैसे कर दिया। संचालक की कमी दिखाकर पहला प्रस्ताव निरस्त होना चाहिए था, तब दूसरा प्रस्ताव समूह की महिलाओं को करना चाहिए था। इसमें समूह की सभी महिलाओं की सहमति होनी चाहिए। एक-दो महिला के प्रस्ताव से टेंडर निरस्त नहीं हो सकता। प्रसूताओं को भोजन व नाश्ता सुचारू रूप से देने के निर्देश दिए गए हैं। जब तक कोई निर्णय नहीं हो जाता है, तब तक जिसके नाम टेंडर है वही भोजन व्यवस्था समय से करेगा। - शोभा अग्रवाल, सीएमएस महिला अस्पताल
दूध की थैली दिखाती प्रसूता। संवाद
दूध की थैली दिखाती प्रसूता। संवाद
दूध की थैली दिखाती प्रसूता। संवाद
दूध की थैली दिखाती प्रसूता। संवाद
दूध की थैली दिखाती प्रसूता। संवाद
दूध की थैली दिखाती प्रसूता। संवाद
दूध की थैली दिखाती प्रसूता। संवाद
दूध की थैली दिखाती प्रसूता। संवाद
दूध की थैली दिखाती प्रसूता। संवाद