बदायूं। जिले के निजी स्कूलों में आरटीई (राइट टू एजूकेशन) के तहत दाखिला लिए गरीब बच्चों के साथ भेदभाव किए जाने की शिकायतें आई हैं। अभिभावकों का आरोप है कि प्रवेश तो दे दिया गया, लेकिन इनको कक्षाओं में शामिल नहीं किया जाता। कुछ स्कूलों में तो इन्हें अलग कमरे या अलग सेक्शन में बैठाया जा रहा है। इससे बच्चों का आत्मविश्वास टूट रहा है और वे हीनभावना से ग्रसित हो रहे हैं।
जिले में आरटीई के तहत 2571 बच्चों का प्रवेश निजी विद्यालयों में हुआ है। कुछ स्कूलों में बच्चों के साथ भेदभाव करने के मामले सामने आए हैं। शिकायतकर्ता मोहन सिंह का कहना है कि उनका बच्चा आरटीई के तहत एक निजी स्कूल में पढ़ता है। उसके साथ ही कई अन्य बच्चों का आरटीई के तहत दाखिला हुआ है।
इन बच्चों को अलग कक्षा में पढ़ाया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस तरह का भेदभाव न केवल आरटीई अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों के मौलिक अधिकारों के भी खिलाफ है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अभिभावकों ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) से मौखिक शिकायत की है। बीएसए ने अभिभावकों को आश्वासन दिया है कि शिकायत की जांच कराई जाएगी। उन्होंने जल्द ही एक टीम गठित कर निजी स्कूलों का औचक निरीक्षण कराने की बात कही।
वर्जन-
- अगर जांच में किसी भी निजी स्कूल में भेदभाव की पुष्टि होती है, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द तक की जा सकती है। आरटीई का उद्देश्य सभी वर्गों के बच्चों को समान शिक्षा उपलब्ध कराना है और इसके साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। -वीरेंद्र कुमार सिंह, बीएसए