बदायूं। कानून की किसी किताब में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई चीज नहीं है, यह सिर्फ ठगी का एक फंडा है, जिसे साइबर ठग इस्तेमाल कर रहे हैं। लोग घबराकर व डरकर इन ठगों के झांसे में आ जाते हैं। ऐसे कॉल आने पर डरना नहीं है, बल्कि सीधे पुलिस को फोन लगाकर बताना है। यह बातें अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से आयोजित पुलिस की पाठशाला में एसपी सिटी अमित किशोर श्रीवास्तव ने बताईं।
राजकीय महाविद्यालय आवास विकास में हुए कार्यक्रम के दौरान एसपी सिटी ने छात्र-छात्राओं को साइबर क्राइम के बारे में जानकारी दी। उन्हें बताया कि किसी भी लिंक को यूं ही न खोलें। बताया कि लिंक खोलने के साथ ही आपकी सारी जानकारी ठगों के हाथों में पहुंच जाती है। चूंकि आपके मोबाइल का फेस कैमरा खुला रहता है, इसलिए आपका फोटो स्वत: ही ठगों के पास पहुंच जाता है।
बोले, किसी को भी पासवर्ड न दें व बगैर जानकारी के किसी के द्वारा भेजी गई लिंक न खोलें। उन्होंने बताया कि अगर कभी आपको लिंक खोलना भी पड़े तो मोबाइल को ऐसा कर दीजिए कि आपका चेहरा न आए। इससे ठग आपका चेहरा नहीं देख सकेगा। होता यह है कि साइबर ठगों ने कई लिंक बना रखे हैं। लोगों को झांसे में लेकर ये लोग ठग लेते हैं। जैसे ही लिंक खुलता है जानकारी के अलावा आपकी फोटो तक ठगों के पास पहुंच जाती है। इसके बाद ये लोग ब्लैकमेल करते हैं।
इसके अलावा उन्होंने डिजि लॉकर एप के बारे में जानकारी दी। बताया कि सरकार की तरफ से डिजिटल लॉकर एप लांच किया गया है। इसके तहत आप अपने सभी दस्तावेज इस डिजि लॉकर में फीड करके सुरक्षित रख सकते हैं। अगर आप कहीं जाते हैं और इन दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है तो इस एप के माध्यम से उन्हें आगे दिया भी जा सकता है। यह प्रक्रिया सब जगह मान्य है। इस दौरान उपप्राचार्य श्रद्धा गुप्ता, राकेश कुमार जायसवाल, सतीश सिंह यादव, गौरव कुमार सिंह व रविंद्र यादव आदि मौजूद रहे।
छात्र-छात्राओं ने पूछे सवाल
छात्र रचित शर्मा ने सवाल किया कि जो लोग ठगी करते हैं उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होती है, जबकि खातों के जरिए उनके आधार कार्ड तक पहुंचा जा सकता है। एसपी सिटी ने बताया कि साइबर ठगों को पकड़ने के लिए बाकायदा साइबर थाना बना है। टीमें जांच करती हैं, लेकिन ये ठग बेहद शातिर होते हैं। आधार कार्ड, पते, नाम सब फर्जी होते हैं। इसलिए पुलिस को इन्हें पकड़ने में दिक्कत आती है।
सरिता यादव ने पूछा कि डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचा जा सकता है। इस पर एसपी सिटी ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं। अगर किसी के पास फोन आता है और कोई डिजिटल अरेस्ट करने को धमकाता है तो समझ जाइए कि वह झूठ बोल रहा है। इसके अलावा और भी छात्र-छात्राओं ने सवाल पूछे।
कार्यक्रम में मौजूद छात्र-छात्राएं। संवाद