बदायूं। सीडीओ की चार सदस्यीय टीम ने जिला अस्पताल में बने डायलिसिस के नवनिर्मित भवन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि भवन तो तैयार है, लेकिन अब तक अग्निशमन यंत्र नहीं लगे हैं। सीडीओ केशव कुमार ने ठेकेदार को अग्निशमन यंत्र लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि अग्निशमन यंत्र लगने के बाद ही भवन का हस्तांतरित संभव हो सकेगा।
शासन के निर्देश के अनुसार, कोई सरकारी भवन तब तक हस्तांतरित नहीं हो सकता जब तक प्रशासन द्वारा गठित टीम भवन का निरीक्षण कर उसे सही न ठहरा दे। डायलिसिस के भवन के निरीक्षण के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में टीम गठित की गई है। इसमें सीडीओ के अलावा लोक निर्माण विभाग के अभियंता, बिजली विभाग के अभियंता समेत चार लोगों को शामिल किया गया है।
शुक्रवार देर शाम टीम ने जिला अस्पताल में बनाए गए भवन का निरीक्षण किया। निरीक्षण में सामने आया है कि अगर कहीं आग लग जाए तो बुझाने के कोई इंतजाम नहीं हैं। सीडीओ केशव कुमार ने ठेकेदार को अग्निशमन यंत्र लगाने के निर्देश दिए। इसके बाद ही भवन विभाग को हस्तांतरित करने की बात कही।
अस्थायी भवन में चल रहा डायलिसिस सेंटर
डायलिसिस का नया भवन तैयार है, लेकिन हस्तांतरित नहीं हो सका है। डायलिसिस सेंटर अभी अस्थायी भवन में संचालित है। इससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां प्रतिदिन दो से तीन ही मरीजों की डायलिसिस संभव हो पा रही है। अगर भवन में सेंटर संचालित हो जाए तो करीब 10 मरीजों को प्रत्येक दिन लाभ मिल सकेगा।
ऐसे संचालित कर दिया था सेंटर
साल 2020 में डायलिसिस यूनिट को मंजूरी मिलने के बाद करीब 80 लाख रुपये की लागत से इसके लिए भवन का निर्माण कराया गया। जनवरी 2022 में निर्माण शुरू हुआ। छह माह में भवन निर्माण पूरा होना था, लेकिन 11 महीने लग गए। दिसंबर 2023 में भवन का निर्माण पूरा हो गया। बीते सात महीने में अधिकारी भवन हस्तांतरित कराने की प्रक्रिया पूरी नहीं करा सके हैं। अब निरीक्षण में अग्निशमन यंत्र लगा न होने की कमी पाई गई है।
भवन तैयार है, लेकिन हस्तांतरित नहीं हो सका है। इसके लिए सीडीओ की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम ने निरीक्षण कर लिया है। जो भी कमी पाई गई है, उसको ठेकेदार दूर कराएंगे। इसके बाद ही भवन हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। - डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस
जिला अस्पताल में संचालित डायलिसिस सेंटर। संवाद