बदायूं जिले में स्मार्ट मीटर लगाने पर अस्थायी रोक लगने के बावजूद उपभोक्ताओं की समस्याएं कम नहीं हो रहीं। करीब 67 हजार घरों में लगाए गए स्मार्ट मीटर, खासकर प्रीपेड मोड वाले, लोगों के लिए लगातार परेशानी का सबब बने हुए हैं। उपभोक्ता प्रीपेड से पोस्टपेड मोड में बदलवाने के लिए विद्युत उपकेंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। यह स्थिति आम आदमी के लिए वित्तीय और मानसिक तनाव का कारण बन रही है।
जिले में 4.86 लाख उपभोक्ता हैं, जिनमें से लगभग 67 हजार घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से अधिकांश मीटर को प्रीपेड किया जा चुका है। उपभोक्ताओं का कहना है कि पोस्टपेड मीटर में उन्हें मासिक बिल की स्पष्ट जानकारी रहती थी, जबकि प्रीपेड में यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि महीने का कितना बिल आ रहा है।
इस अनिश्चितता को लेकर अधिकारी भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे, जिससे उपभोक्ता निराश होकर लौट रहे हैं। स्मार्ट मीटर लगाए जाने पर शुरू में भी काफी विरोध हुआ था, बावजूद इसके इन्हें घरों में स्थापित किया गया। प्रीपेड मोड में बदलने के बाद उपभोक्ताओं की बेचैनी और बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री के संज्ञान के बाद लगी है रोक
स्मार्ट मीटर को लेकर जारी विरोध के बीच मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लिया था। उन्होंने 12 अप्रैल को एक तकनीकी समिति गठित की थी। इसके बाद भी कई स्थानों पर उपभोक्ताओं ने आंदोलन जारी रखे। ऐसे में शनिवार रात पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने तकनीकी रिपोर्ट आने तक स्मार्ट मीटर बदलने पर रोक लगा दी। हालांकि, इस रोक के बावजूद नए कनेक्शन धारकों को स्मार्ट मीटर प्रीपेड मोड के माध्यम से ही कनेक्शन दिए जाएंगे। यह प्रावधान मौजूदा उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान नहीं करता। अधीक्षण अभियंता चंद्रशेखर कुमार ने बताया कि उन्हें स्मार्ट मीटर बदलने पर रोक संबंधी कोई आदेश नहीं मिला है। जो मीटर प्रीपेड मोड में बदले जा चुके हैं, वे उसी मोड में रहेंगे।
मजदूर और कम आय वाले उपभोक्ता परेशान
स्मार्ट मीटर को प्रीपेड मोड में बदलना आम आदमी को भारी पड़ रहा है। शहर में रहने वाले दिहाड़ी मजदूर और कम आय वाले उपभोक्ताओं को प्रीपेड मोड की वजह से ज्यादा दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। उनके पास इतनी राशि नहीं होती कि वे एडवांस में जमा कर सकें। इसलिए उन्हें हर आठ दिन बाद विद्युत उपकेंद्रों पर जाकर बिजली का बिल जमा करना पड़ रहा है।
महाराज नगर की रुखसाना ने कहा कि मैं लोगों के घरों में काम करती हूं। मजबूरी में लोगों से एडवांस लेकर बिल जमा करने आई हूं। अगर पहले जैसी पोस्टपेड व्यवस्था लागू हो जाए तो परेशानी दूर हो जाएगी। हर 15 दिन में निगम के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे।
कबूलपुरा के अरशद अली ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने के बाद से बिल की झड़ी लग गई है। एडवांस में एक हजार रुपये रखने पड़ते हैं, उसके बाद भी 15 दिन में बिल जमा कर रहा हूं, अगर यह मीटर प्रीपेड से बदलकर पहले की तरह पोस्टपेड हो जाए तो आधी मुश्किलें कम हो जाएंगी।
अधीक्षण अभियंता चंद्रशेखर कुमार ने बताया कि स्मार्ट मीटर बदलने पर रोक संबंधी कोई आदेश अभी प्राप्त नहीं हुआ है। मीडिया में चल रही खबरों के माध्यम से ही मुझे जानकारी हुई है। जैसा आदेश आएगा उसके हिसाब से ही काम किया जाएगा। हां, जो मीटर प्रीपेड मोड में बदले जा चुके हैं वह उसी मोड में रहेंगे।