बदायूं। रेलवे लाइन के ब्रॉडगेज होने के बाद जिले के लोगों ने सोचा कि यहां से अब सभी जगह के लिए ट्रेनें मिल जाएंगी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। वो भी तब जब केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने खुद बदायूं से दिल्ली व लखनऊ के लिए ट्रेन चलाने के लिए रेलमंत्री से पैरवी की थी। बताते हैं कि केंद्रीय मंत्री के दिलचस्पी लेने के कारण दो साल पहले ट्रेनों के संचालन की सुगबुगाहट हुई। तब समय सारिणी बनाने की बात भी सामने आई, लेकिन ट्रेन नहीं चल सकी।
बदायूं में 2015 में रेलवे लाइन के ब्रॉडगेज होने के बाद लोगों को उम्मीद जागी थी कि यहां से दिल्ली-लखनऊ के लिए सीधी ट्रेन मिल जाएगी, लेकिन अब तक देश की राजधानी दिल्ली व प्रदेश की राजधानी लखनऊ से बदायूं कि लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है। बीएल वर्मा ने ट्रेन चलाने के लिए रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव को चिट्टी भी लिखी थी। बताया जाता है कि वह खुद इस संदर्भ में उनसे मिले भी। इसके बाद दिल्ली-लखनऊ के लिए ट्रेन चलाने को लेकर मंथन हुआ।
बीते साल सुगबुगाहट हुई कि कासगंज से बनारस तक लखनऊ के रास्ते वाया अयोध्या होकर एक जोड़ी ट्रेन चलाई जाएगी। वहीं कासगंज से चलकर सोरों, उझानी, बदायूं, रामगंगा, बरेली जंक्शन, मुरादाबाद, गाजियाबाद के रास्ते दिल्ली के लिए ट्रेन चलाई जाएगी, लेकिन ट्रेन चल नहीं सकी।
रोजाना चार हजार से ज्यादा लोग जाते हैं दिल्ली
रोडवेज बस से रोजाना करीब चार हजार से ज्यादा लोग बदायूं से दिल्ली के लिए बस से यात्रा करते हैं। दिल्ली रूट पर सवारियों को देखते हुए रोडवेज ने 80 बसें इस रूट पर लगाई हुईं हैं। लखनऊ जाने वाले लोग रोडवेज बसों से बरेली तक जाते हैं। यहां से ट्रेन व बसों से लखनऊ जाते हैं। हालांकि दिल्ली की अपेक्षा बदायूं से लखनऊ जाने वाले यात्री कम हैं। इसके अलावा दिल्ली-लखनऊ से कई वीआईपी को यहां आना-जाना होता है। ट्रेन न होने के कारण वह सड़क के रास्ते से आने को मजबूर होते हैं।
ट्रेन चलने से जिले के व्यापार पर भी पड़ेगा असर
बदायूं से सीधे दिल्ली और लखनऊ के लिए रेल सेवा शुरू होने पर आम जनता के साथ व्यापारियों को भी लाभ मिलेगा। अधिकांश व्यापारी दिल्ली से ही माल मंगवाते हैं। सीधे ट्रेन न होने के कारण व्यापारियों को ट्रांसपोर्ट पर ही निर्भर रहना पड़ता है। उद्यमी प्रतीश गुप्ता बताते हैं कि ट्रांसपोर्ट से वह दिल्ली से 7 से 8 रुपये किलो भाड़े पर माल मंगवाते हैं, जबकि ट्रेन से भाड़ा दो रुपये किलो पड़ता है। ऐसे में समझा जा सकता है कि व्यापारियों को कितनी परेशानी हो रही होगी।
वाशिंग पिट न बन सकने के कारण बदायूं से नहीं चल सकती ट्रेन : बीएल
उझानी निवासी केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने बताया कि बदायूं से दिल्ली-लखनऊ के लिए ट्रेन चलाने को लेकर रेलमंत्री से बात हुई थी। उन्होंने अधिकारियों को बदायूं भेजकर सर्वे भी कराया था। टीम को यहां वाशिंग पिट बनाने के लिए समुचित जगह नहीं मिल पाई थी। जहां कहीं से भी ट्रेन चलती है तो वहां वाशिंग पिट जरूरी होती है। ताकि डिब्बों में पानी भरा जा सके। ट्रेन की साफ-सफाई हो सके। इस वजह से ट्रेन बदायूं से नहीं चल सकी। मंत्री का कहना है कि दिल्ली और लखनऊ के लिए ट्रेन चलवाने को वह अब भी प्रयासरत हैं। वाशिंग पिट के लिए अगर ट्रेन बदायूं से नहीं चल पा रही है तो इसे कासगंज से चलवाने के प्रयास किए जाएंगे।
संसद में उठा चुके हैं मुद्दा
बदायूं। सपा सांसद आदित्य यादव ने बताया कि बदायूं से दिल्ली व लखनऊ के लिए ट्रेन चलवाने का मुद्दा वह संसद में उठा चुके हैं। इसके साथ ही ट्रेन चलवाने के लिए रेलमंत्री को पत्र भी लिख चुके हैं। बावजूद इसके सरकार बदायूं की जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि यह बदायूं जिले का दुर्भाग्य है कि भाजपा सरकार बदायूं के लोगों को देश व प्रदेश की राजधानी के लिए एक ट्रेन तक नहीं दे पा रही है। संवाद
महाकुंभ आते ही लोकल ट्रेनों में बढ़ा यात्रियों का बोझ
बदायूं से महज कासगंज व बरेली के लिए ही ट्रेनें हैं। बरेली से कासगंज तक के लिए दिन में छह जोड़ी ट्रेनें चलती हैं। इसके अलावा एक जोड़ी ट्रेन टनकपुर से मथुरा के लिए है। ऐसे में महाकुंभ के दौरान जिले से भी बढ़ी संख्या में लोग आ-जा रहे हैं। अधिकांश लोग ट्रेन से बरेली जा रहे हैं। फिर बरेली से प्रयागराज के लिए ट्रेन पकड़ रहे हैं। ऐसे में लोकल ट्रेनों में महाकुंभ के यात्रियों का भी भार पड़ गया है। यही कारण है कि यहां से गुजरने वालीं सभी ट्रेनें फुल चल रहीं हैं। यहां तक कि शाम को मथुरा से टनकपुर जाने वाली ट्रेन भी यात्रियों से भरी जा रही है। बरेली जाकर आधी से ज्यादा ट्रेन खाली हो जाती हैं।
सांसद आदित्य यादव
सांसद आदित्य यादव
सांसद आदित्य यादव