जिले में अति कुपोषित बच्चों को पोषित करने के लिए जिलाधिकारी ने रणनीति तैयारी की है। इसके तहत बाल विकास के अलावा स्वास्थ्य, पंचायतीराज, शिक्षा और आपूर्ति विभाग को भी जोड़ा गया है। यही नहीं अति कुपोषित बच्चों के लिए अन्य लोगों से भी सहयोग लिया जाएगा। जल्दी ही इस रणनीति को कार्यरूप देने की तैयारी चल रही है। इसके लिए सेमिनार बुलाया जाएगा।
जिले में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों के लिए आखिरी चरण का सर्वे चल रहा है। अब तक सर्वे में अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों की संख्या काफी है। कुपोषण से निपटने के लिए सबसे पहले अति कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सेहत पर ध्यान दिया जाएगा। डीएम ने बाल विकास के अलावा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से भी समयांतर पर चेकअप, टीकाकरण करने पर जोर दिया है। शिक्षा से जुड़े अधिकारियों को जागरूकता और आपूर्ति विभाग को ऐसे परिवार को राशन कार्ड की व्यवस्था की उसे निर्धारित अनाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके अलावा पंचायतीराज विभाग को इन गांवों में साफ सफाई की व्यवस्था का दायित्व सौंपा जाएगा। शासन की मंशा को पूरा करने के लिए डीएम ने कुपोषण के खिलाफ सुुनियोजित अभियान चलाए जाने को रणनीति बनाई है। इसके लिए उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों से अब तक कई चक्र वार्ता की है।
फैक्ट फाइल
कुल आंगनबाड़ी केंद्र-2,937
अति कुपोषित बच्चे- 1,490
कुपोषित बच्चे- 17,579
कुपोषण को सर्वे के केंद्र- 2,519
सर्वे होने को शेष केंद्र- 418
कुपोषण को दूर करने के लिए जिला स्तर पर सार्थक प्रयासों को बल मिल रहा है। इसके लिए जिलाधिकारी ने रणनीति तय की है, अन्य विभागों को भी जोड़ा है। कुपोषण दूर करने को जन सहयोग भी लिया जाएगा।
-निर्मला शर्मा, डीपीओ, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग