संविदा ईकाई के प्रदेश महामंत्री की अध्यक्षता में हुए इस धरना प्रदर्शन में उन्होंने कहा कि कर्मचारियों से ब्लैंक चेक दस्तखत कराकर उन्हें भुगतान 3500 रुपये दिया जाता है। किसी कर्मचारी के ईपीएफ कटौती का पैसा खाते में नहीं जा रहा है और न ही किसी कर्मचारी का बीमा कराया जा रहा है। पावर कारपोरेशन के आदेश आते हैं लेकिन किसी आदेश का पालन उनके हित में नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों द्वारा उनका आर्थिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है। ईपीएफ के करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है। इसकी जांच होनी चाहिए। दुर्घटना होने पर ठेकेदार और अधिकारी उन्हें अपना आदमी मानने से इंकार कर देते हैं। इससे उन्हें दुर्घटना हित लाभ भी नहीं मिल पाता है। न तो उन्हें कोई परिचय पत्र आवंटित है और न ही उनका नाम की कोई हाजिरी रजिस्टर रखा गया है।
संचालन कर रहे संविदा ईकाई के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन ने कहा कि कर्मचारियों को तीन माह से वेतन नहीं मिला है। कोई कर्मचारी वेतन मांगता है तो उसे हटा दिया जाता है या हटाने की धमकी दी जाती है। ऐसे ही उनकी समस्या का निदान नहीं होता है तो मजबूरन उनको कोर्ट की शरण लेना होगी।
इस मौके पर राजेंद्र प्रसाद, सुभाष कुमार, अनीश अहमद, अवधेश यादव, दान सिंह, चंद्रपाल, तेजपाल सिंह, दिलावर सिंह, प्रेमपाल सिंह, हरीश लोकेंद्र प्रताप सिंह आदि ने भी विचार व्यक्त किए। धरना प्रदर्शन में पूरे जिले के संविदा कर्मी शामिल हुए।