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Budaun News: सालभर शिक्षकों की कमी से जूझते रहे डिग्री कॉलेज

Sun, 28 Dec 2025 11:38 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
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बरसुआ में बन रहा मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय। संवाद
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बदायूं। वर्ष 2025 में शिक्षकों की कमी से डिग्री कॉलेज जूझते रहे। जहां एक ओर शासन की योजनाओं के तहत नए विद्यालयों और कॉलेजों की सौगात मिली, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की कमी, बच्चों की घटती उपस्थिति और संसाधनों की सीमाएं भी सामने आईं। कुल मिलाकर यह साल शिक्षा के लिए उपलब्धियों और चुनौतियों का मिश्रण रहा। जिसने आने वाले वर्ष 2026 के लिए नई उम्मीदें जगाईं। कई डिग्री कॉलेजों में वर्षों से नियमित प्राध्यापकों की नियुक्ति नहीं हो सकी। जिले के तहसील सहसवान के नाधा में स्थित राजकीय डिग्री कॉलेज में स्टाफ के नाम पर पूरे साल प्राचार्य समेत दो से तीन स्टाफ ही रहा। यहीं हाल बिल्सी में स्थित महाराणा प्रताप सिंह राजकीय डिग्री कॉलेज और बिसौली में स्थित दमयंती राज आनंद राजकीय डिग्री कॉलेज का रहा। यहां पर पूरे साल स्टाफ कम रहा।
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मुख्यमंत्री योजनाओं से मजबूत हुआ आधारभूत ढांचा
शिक्षा विभाग के लिए यह वर्ष इसलिए भी खास रहा, क्योंकि जिले को एक मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय और दो मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों की स्वीकृति मिली। इनमें से हैदलपुर में अभ्युदय विद्यालय, बरसुआ में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, आधुनिक प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल मैदान और डिजिटल शिक्षण सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि 2026 से इन विद्यालयों में पढ़ाई शुरू हो जाएगी, जिससे ग्रामीण इलाकों के बच्चों को भी शहर जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी।

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उसावां में राजकीय डिग्री कॉलेज खुलना बना ऐतिहासिक कदम

-उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ी उपलब्धि उसावां में स्वर्गीय रामपाल सिंह राजकीय डिग्री कॉलेज की स्थापना रही। यह पहली बार है जब दातागंज तहसील क्षेत्र को अपना राजकीय डिग्री कॉलेज मिला है। इससे पहले छात्र-छात्राओं को बदायूं, बिसौली या बिल्सी जाना पड़ता था, जो खासकर छात्राओं के लिए कठिन और असुरक्षित था। कॉलेज खुलने से न सिर्फ शिक्षा का स्तर बढ़ा है, बल्कि बालिकाओं की उच्च शिक्षा में भागीदारी भी बढ़ने की उम्मीद जगी है।
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खेल के मैदान से निकलीं जिले की नई पहचान
-शिक्षा के साथ खेलों में भी बदायूं की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन किया। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय म्याऊ की शिवानी यादव, शशि और कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय अंबियापुर की निर्दोष ने खो-खो प्रतियोगिता में प्रदेश स्तर पर पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया। इन छात्राओं का राष्ट्रीय स्तर के लिए चयन होना इस बात का प्रमाण है कि यदि संसाधन और अवसर मिलें तो ग्रामीण प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय मंच पर चमक सकती हैं
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बच्चों की उपस्थिति बनी गंभीर चिंता
-जिले में 2.95 लाख नामांकित छात्रों के बावजूद नियमित उपस्थिति एक बड़ी चुनौती बनी रही। आर्थिक तंगी, बाल श्रम, पलायन और अभिभावकों की उदासीनता इसके मुख्य कारण रहे। सरकार द्वारा सख्त मॉनिटरिंग और वेतन रोकने जैसे कदमों के बाद स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन शिक्षा विभाग मानता है कि जब तक समाज और अभिभावक साथ नहीं आएंगे, तब तक समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी।

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2026 से बड़ी उम्मीदें

-शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि 2026 में अधूरे निर्माण पूरे होंगे, शिक्षक नियुक्तियां होंगी और डिजिटल शिक्षा का विस्तार होगा। साथ ही बालिकाओं की शिक्षा, खेल और तकनीकी प्रशिक्षण को और बढ़ावा दिया जाएगा।

बरसुआ में बन रहा मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय। संवाद

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