20 बड़े तालाबों को नहीं मिला धन, 357 छोटे तालाबों पर काम शुरू
डार्क ब्लाकों में एक हेक्टेयर से अधिक तालाबों को बनाना था रीचार्ज प्वाइंट
लखनऊ में जल निगम की टीम उलझा रही है प्रोजेक्ट, वाटर रिचार्ज मुश्किल
जिले की तीन संस्थाओं ने भूगर्भ जल संकट से त्रस्त चार डार्क श्रेणी के ब्लाकों में एक हेक्टेयर से अधिक के 20 तालाबों को रीचार्ज प्वाइंट बनाने के लिए शासन की तकनीकी टीम को प्रस्ताव बनाकर भेजे हैं लेकिन अभी तक उनपर वित्तीय स्वीकृति न मिल पाने के कारण कोई काम नहीं हो पा रहा है। तालाबों के जरिए वाटर रिचार्जिंग कैसे हो पाएगा? इस पर सवाल खड़े हुए हैं।
जिलसे में लगभग 4500 छोटे-बड़े तालाब हैं। इनको वाटर रिचार्जिंग लाइक बनाने के लिए इस सीजन में 357 तालाबों को रिचार्जिंग लाइक तैयार करने को कहा गया था। मनरेगा की सूची में शामिल इन सभी तालाबों की खुदाई की जा रही है। रिचार्ज लायक बनाए जा रहे हैं। यही नहीं 20 ऐसे बड़े तालाब जिनका रकवा एक हेक्टेयर से अधिक है। इन्हें लघु सिंचाई विभाग, प्रोजेक्ट कारपोरेशन और जल निगम को इनको खुदाई का काम दिया गया। इन संस्थाओं ने इनके लिए प्रस्ताव बनाकर सरकार में जल निगम की तकनीकी टीम को स्वीकृति को भेजा। इस पर आपत्तियां लगीं लेकिन इन आपत्तियों का निदान भी भेज दिया गया है। बावजूद इसके अभी तक इनके लिए वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पाई है। बरसात से पूर्व तालाबो की खुदाई का काम पूरा करना होता है। वित्तीय स्वीकृति में विलंब जिले में वाटर रिचार्जिंग की मंशा पर पानी फेर सकता है।
बड़े तालाबों को 2.40 करोड़ के हैं प्रस्ताव
बदायूं। जिले में भूगर्भ जल के रीचार्ज के प्रयासों में जिले में भारी शिथिलता है। एक हेक्टेयर से बड़े 20 तालाबों की खुदाई के लिए करीब 2.40 करोड़ के प्रस्ताव जल निगम की तकनीकी टीम को भेजे गए हैं। यह सभी 20 तालाब अंबियापुर, सहसवान, इस्लामनगर और आसफपुर में हैं। यह सभी ब्लाक डार्क श्रेणी में आए हैं।
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बड़े तालाबों के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजे जा चुके हैं। सुधार को कहा गया, वे सुधार भी प्रस्ताव में करा दिए गए हैं। बावजूद इसके प्रदेश की तकनीकी टीम ने इन महत्व के कामों के लिए वित्तीय स्वीकृति की संस्तुति नहीं की है। उम्मीद है कि जल्दी ही इन कामों को वित्तीय स्वीकृति मिज जाएगी।
- कामेंद्र, जेई लघु सिंचाई।