शहर में अधिकतर प्राथमिक विद्यालय खस्ताहाल, गिरताऊ हाल में
शहर में अधिकतर प्राथमिक विद्यालय खस्ताहाल हैं। कहीं छत नहीं है तो कहीं बिल्डिंग गिरताऊ हालत में है। कई स्कूलों में बच्चे खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ाई करते हैं। मिड-डे मील पर लाखों रुपये खर्च करने वाली सरकार और प्रशासन के अफसरों को इन नौनिहाल की जान की कोई परवाह नहीं है।
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छत से गिर रहा सीमेंट, कभी भी हो सकता है हादसा
प्राथमिक विद्यालय सोथा में 69 बच्चे पंजीकृत है। इस बिल्डिंग में विद्यालय करीब 50 सालों से चल रहा है। स्टाफ ने बताया कि प्राइवेट भवन में विद्यालय होने के कारण यहां पर कोई काम नहीं कराया जा सका है, क्योंकि कुछ भी काम कराने की कोशिश करते हैं, तो भवन मालिक उस पर निर्माण करने से रोक देता है। मजबूरी में ऐसे भवन में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। विद्यालय की छत से सीमेंट छूटकर गिर रहा है। इसलिए उपर पन्नी की छत बनाकर डाली है।
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झोपड़ी नुमाकक्ष में पढ़ने को मजबूर बच्चे
प्राथमिक विद्यालय फरटोली टोला की जिस बिल्डिंग में चल रहा है। वह प्राइवेट है। जिससे विभाग की ओर से किराए पर लिया गया है। अब बिल्डिंग की हालात बेहद खराब हो गई है। इस कारण बच्चों को पन्नी से बनाई गई छप्परनुमा झोपड़ी में पढ़ाया जा रहा है। ताकि अगर बिल्डिंग गिरे तो बच्चे उसमें दब न जाएं।
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टिनशेड ही बचा सहारा
प्राथमिक विद्यालय कबूलपुरा द्वितीय में बच्चों को टिनशेड के नीचे बैठकर पढ़ाई करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यहां पर भी विद्यालय बिल्डिंग के नाम पर केवल एक कक्ष था। स्टाफ ने बताया यहां पर बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। कई बार बिल्डिंग को सही कराने का काम किया लेकिन उसे भवन स्वामी ने नहीं होने दिया। साथ ही बिल्डिंग को खाली कराने के लिए नोटिस दिया है।
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पन्नी की छत के नीचे हो रही पढ़ाई
प्राथमिक विद्यालय खंडसारी के बने विद्यालय की हालत तो बहुत ही दयनीय थी। यहां पर विद्यालय के नाम चहारदीवारी और एक छोटा सा कमरा था। कमरे में विद्यालय संबंधी अभिलेख से लेकर अन्य सामान भरा हुआ था। वहां पर न तो प्रधानाध्यापक के बैठने के लिए जगह थी। विद्यालय परिसर में एक पन्नी डाल रखी थी। जिसके नीचे विद्यालय स्टाफ बैठा था। वही बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे थे। ---------
जर्जर है बिल्डिंग
यहां पर विद्यालय करीब 50 सालों से चलता आ रहा है। इस विद्यालय में दो स्कूल संचालित है। इसकी बिल्डिंग जर्जर है। इसके बारे में अधिकारियों को बताया गया है। विद्यालय की ओर से पांच हजार रुपये दिया जाता है। उसी रुपये से विद्यालय की छत पर बनाई गई है। -रिजवाना परवीन, सोथा
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एक ही कमरा है, चाहे पढ़ाओ या सामान रखो
विद्यालय यहां पर काफी अरसे से चल रहा है। हालांकि अब यहां पर कोई भी कक्ष बच्चों की पढ़ाई के लिए नहीं बचा है। विभाग की ओर से जो धनराशि मिली, उससे पन्नी खरीद ली। ताकि बच्चों को धूप और बरसात से बचाया जा सके।
-उजमा, खंडसारी