बदायूं/ उझानी।
शराब का शौक पूरा करने के लिए सुरा प्रेमियों की जेब हल्की होना लाजिमी है लेकिन ऐसे में अगर मिलावट हो तो सुरूर सिर चढ़कर नहीं बोलेगा। देसी की छोड़िए, अंग्रेजी के ब्रांडेड आइटम भी मिलवाट की चपेट में आ गए हैं। ब्रांडेड अंग्रेजी शराब चाहे जितनी महंगी खरीद लो, लेकिन मास्टरमाइंड मिलावटखोरों के आगे खरीदने पर पहचान करना भी मुश्किल हो जाता है। पानी की मिलावट या फिर ठर्रे की दस्तक का अहसास तब होता है जब पीने में मजा ही नहीं आता।
अंग्रेजी शराब के ब्रांडेड आइटम में पानी की मिलावट के खेल को लेकर कुछ आबकारी अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं। उन्हीं की जिम्मेदारी है कि वह शराब की दुकानों पर पहुंचकर गुणवत्ता परखने के लिए नमूने लें लेकिन एक बार भी ऐसा देखने को नहीं मिलता। मिलावट करने वालों ने अजीब फंडा अख्तियार कर रखा है। बोतल में मिलावट करनी है तो ढक्कन को कुछ इस तरह खींच लेते हैं कि पानी मिलाने के बाद फिर से उसे लगाया जाए तो खरीदार को ढक्कन लूज होने का अहसास भी नहीं हो पाए। वैसे, पिछले महीनों में देसी में मिलावट की शिकायतें सामने आती थी। उस वक्त ब्रांडेड आइटम में मिलावट से सेल्समैन भी कतराते थे। अब तो शराब की दुकानों के सामने सेल्समैन और खरीदारों में मिलावट को लेकर चिकचिक आम बात हो गई है।
हंगामा होने पर मामला आबकारी अफसरों के संज्ञान में भी पहुंचा था लेकिन गौर करने की बजाय कारोबारियों के जरिए महकमे के कर्मचारियों ने मामला निपटा दिया। सूत्रों की माने तो मिलावट वाली शराब की डिग्री नेचुरल रखने के लिए एक ऐसे केमिकल का इस्तेमाल होने लगा है जो अगर मानक से अधिक मिला दिया जाए तो जान पर जोखिम भी बन आएगा। इसके विपरीत, बोतल से लेकर हॉफ और क्वाटर तक पर ओवररेट के रूप में प्रति आइटम 10 से 20 रुपया वसूल किया जाने लगा है। ओवररेट को लेकर शिकायतों पर शराब कंपनी के कारिंदे गौर नहीं करते।
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मिलावट की वजह से बढ़ा गैर प्रांतों से तस्करी का धंधा
उझानी। ब्रांडेड आइटम की शराब में मिलावट का ही नतीजा है कि सुरा के शौकीन अच्छी गुणवत्ता की खातिर दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड की शराब को पसंद करते हैं। दिल्ली और यूपी के रेट में हालांकि कोई ज्यादा अंतर नहीं है लेकिन क्वालिटी को लेकर लोग उसे 50 रुपया महंगा खरीदने में भी गुरेज नहीं करते। शौकीन लोगों की माने तो रुपये ज्यादा भले ही जाते हैं लेकिन माल तो अच्छा मिल जाता है।
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वर्जन.............
शराब में मिलावट के मामले का पिछले दिनों भंडाफोड़ कर आरोपी पकड़ लिया गया था। फिर भी कहीं से ओवररेट और मिलावट की शिकायत आती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। विभाग की टीमें निरीक्षण भी करती रहती हैं।
- सुशील कुमार मिश्रा, जिला आबकारी अधिकारी