ग्राम पंचायत रिजौला निवासी केशवराम ने डीएम को पत्र भेजकर कहा कि उनके ग्राम का प्रधान मंदबुद्धि था। फिर भी लाखों रुपये विकास कार्यों के नाम पर निकाल लिए गए। उन्होंने जनसूचना अधिकार के तहत कई सूचनाएं मांगीं थीं, जिन्हें नहीं दिया गया। गलत तरीके से धनराशि निकाल लिए जाने पर पूर्व में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी को निलंबित किया गया था, जिसे बाद में बहाल भी कर दिया गया।
केशवराम ने कहा है कि पोशाकी लाल मंदबुद्धि का था। वह 2010 से 13 तक प्रधान रहा। उसके मंदबुद्धि और पागल होने की जब शिकायत की गई तब तीन डॉक्टरों के पैनल ने उसकी जांच की थी। जांच में उसके पागल होने की बात साप हो गई थी। इस दौरान ग्राम निधि से 12 लाख 54 हजार, और मनरेगा के तहत पांच लाख से अधिक की धनराशि निकाली गई। बाद में एक जुलाई 13 से उसके खाते पर किसी भी तरह के भुगतान आदि पर रोक लगा दी गई। जब वह मंदबुद्धि था तब किस तरह धनराशि निकाली गई? इस बारे में शिकायत की गई तो डीपीआरओ ने जांच उसावां के बीडीओ भीमजी उपाध्याय को सौंपी थी। गांव के तत्कालीन ग्राम पंचायत विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया गया था। बाद में जांचोपरांत ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने आरोप स्वीकार कर लिए। विभाग ने सहानुभूतिपूर्वक वीडीओ को बहाल भी कर दिया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पूरे मामले में उन्होंने जो सूचनाएं मांगी थीं, वह अभी तक नहीं दी गईं हैं। लिहाजा, उन्हें सभी सूचनाएं दी जाएं। अन्यथा वह राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे।