किसानों को मुआवजा वितरण को लेकर शासन से भले ही रोज नए फ रमान जारी किए जा रहे हैं। मगर स्थानीय स्तर पर यह कागजी प्रतीत हो रहा है। प्रशासनिक मशीनरी द्वारा की जा रही अनदेखी ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है।
एक तो पहले से ही किसान फसलों की बर्बादी से परेशानी के दौरा से गुजर रहा है। अब ऊपर से मुआवजे के तौर पर किसानों को मिलने वाली इमदाद सिरदर्द बनती जा रही है। किसानों को मिलने वाले चेक एकाउंटपेयी दिए जा रहे हैं। इससे किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। यही नहीं तहसील स्तर से किसानों को मिले चेक कटिंग कर तहसीलदार द्वारा प्रमाणित कर वितरण किए गए हैं। इसका बैंक ने भुगतान करने से इनकार कर दिया है। बैंक प्रबंधन का कहना है कि रिजर्व बैंक के आदेश हैं कि चेक पर किसी भी प्रकार कटिंग नहीं होनी चाहिए।
इसी कारण सैकड़ों किसान चेक सही कराने के लिए अब तहसील के चक्कर काट रहे हैं। उनसे कलेक्शन चार्ज भी पड़ रहा है। अगर अधिकारी इसे गंभीरता से लें, तो सीधे तौर पर किसानों के खातों में आरटीजीएस कर दिया जाए, तो अतिरिक्त पैसा भी नहीं कटेगा। शीघ्र भुगतान मिलने से राहत मिलेगी। दूसरी ओर रानैट बिसौली स्थिति शुगर मिल द्वारा चेक भी वापस आ रहे हैं। कारण बताया जा रहा है कि मिल के खाते में पैसा ही नहीं है। इससे किसानों का और भी बुरा हाल है।