उझानी (बदायूं)। अब्दुल्लागंज निवासी करीब दो दर्जन लोगों के खातों में लाखों रुपये के लेनदेन पर हवाला के शक बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं। पुलिस ने दो दिन पहले आरोपी रोहित गोला को धोखाधड़ी में भले ही जेल भेज दिया है लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया कि खातों में लेनदेन कहां से की गई। कहीं ऐसा तो नहीं कि इस रकम का इस्तेमाल धंधेबाज निजी फायदे की बजाए किसी अनैतिक काम में करते रहे हों। ऐसे ही तमाम तरह के इनपुट के आधार पर पुलिस की साइबर सेल हकीकत का पता करने की कोशिश कर रही है।
मामला करीब आठ दिन पहले उजागर हुआ। अब्दुल्लागंज निवासी करीब दो दर्जन लोगों को उनके बैंक खातों में लेनदेन पर शक हो गया था। लाखों रुपये के लेनदेन में खाताधारकों की शिकायत पर पुलिस ने गांव के रोहित गोला को दबोचकर तीन दिन पहले साफ कर दिया था कि खाते उसने लोगों को गुमराह कर खुलवाए थे। इन्हीं खातों से लेनदेन कोई और करता रहा। रोहित ने दिल्ली में रहने वाले आसिफ और बदायूं के शाकिर का नाम बताकर उन्हीं को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा दिया था। खाताधारक अजय कुमार शर्मा की तहरीर पर आसिफ, शाकिर और रोहित के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट करके रोहित को जेल भी भेज दिया था। लेकिन जेल जाने से पहले रोहित यह नहीं बता पाया कि खातों में आसिफ और शाकिर ने कहां से और किस मकसद से पैसे डाले थे। खाताधारकों के एटीएम कार्ड इस्तेमाल कर पैसे किसने निकाले। इस मामले की विवेचना कर रहे प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार चाहर की सहायता के लिए अब साइबर सेल को भी साक्ष्य जुटाने को कहा गया है। खातों में लेनदेन से लेकर आरोपियों के सेलफोन नंबरों तक की इनपुट साइबर सेल को भेजी गई है। सूत्रों की मानें तो बदायूं निवासी शाकिर की तलाश भी शुरू कर दी गई है। शाकिर के पकड़े जाने के बाद पुलिस का आसिफ तक पहुंचना आसान हो सकता है। आसिफ के बारे में रोहित यही बताता रहा था कि वह कभी उझानी का ही मूल निवासी था।
कोई और न निकल आए आसिफ और शाकिर का आका
उझानी। दिल्ली में रहने वाले आसिफ और बदायूं के शाकिर का नाम तो पूछताछ के दौरान अब्दुल्लागंज के रोहित गोला ने बताए थे। दोनों को वह शक्ल से जानता है, यह भी उसी का कहना रहा। महज दो लोग किसी को इस तरह फंसा कर उससे परिचित लोगों के पहले खाते खुलवाए फिर रकम ट्रांसफर कर उसे खुद ही निकाल लेंगे, ऐसा संभव नहीं लगता। आसिफ और शाकिर के साथ कोई और भी हो सकता है। पुलिस की जांच में ऐसा सामने आया तो वह इन दोनों को आका निकलेगा।
- इस मामले की विवेचना उझानी इंस्पेक्टर कर रहे हैं। ऐसे मामलों की विवेचना होती है तो साइबर सेल की मदद लेना लाजिमी है। तभी स्पष्ट तथ्य निकलकर सामने आते हैं और पुलिस मजबूती से चार्जशीट फाइल करती है। इस मामले में भी ऐसी ही किया गया है। साइबर सेल भी जांच में लगी है।
- सर्वेंद्र सिंह, सीओ उझानी