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बकैती शो, स्केच और मोबाइल ने प्रशांत को बनाया स्टार... 19 लाख फॉलोअर

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प्रशांत मिश्रा।संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। मोबाइल पर कार्टून देखने, स्केच बनाने और बातूनीपन की जिन आदतों के कारण बच्चे अपने अभिभावकों की अक्सर डांट खाते हैं, उन्हीं कोउझानी के साधारण परिवार के बेटे प्रशांत ने अपने शानदार भविष्य का साधन बना लिया।
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बीएससी के छात्र प्रशांत ने कॅरिअर को यूटर्न देकर एनिमेशन की दुनिया में हाथ आजमाया और अब दोस्त शिवांक शुक्ला के साथ ‘बकैती शो’ के जरिये बड़ी पहचान बना ली है। टीवी पर यह एक निजी चैनल द क्यू पर प्रसारित होता है तो फेसबुक पेज पीएम टून्स और इसी नाम से यूट्यूब चैनल पर भी है। इसी कारण उनके फेसबुक पेज पर करीब 19 लाख फॉलोअर हैं तो इतने ही यू ट्यूब पर सब्सक्राइबर। इस समय प्रशांत नोएडा में रहकर गुड़गांव में एनिमेशन में पढ़ाई भी कर रहे हैं।
प्रशांत उझानी के किलाखेड़ा के निवासी हैं। उनके पिता राकेश मिश्रा बदायूं के द्रोपदी देवी इंटर कॉलेज में शिक्षक हैं। सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार के प्रशांत दो भाई और एक बहन में सबसे छोटे हैं। प्रशांत की शुरुआती पढ़ाई उझानी के हरविलास गोयल इंटर कॉलेज में हुई और आगरा के एक कॉलेज से उन्होंने बीएससी किया। प्रशांत का कहना था कि बचपन से ही उन्हें स्केच व कार्टून बनाने का शौक था। मोबाइल पर ज्यादा बिजी रहना और कार्टून देखना भी अच्छा लगता था। मम्मी-पापा को उनकी यह आदत बुरी लगती थी। वह नहीं चाहते थे कि बेटा मोबाइल में व्यस्त रहे।
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इस बीच बीएससी करने के दौरान जब उसकी सोच का दायरा बढ़ा तो एनिमेशन के बारे में जानकारी की। पता लगा कि स्केच व कार्टून बनाने का जो काम वह शौक के तौर पर बरसों से कर रहे हैं, वही एनिमेशन की पहली सीढ़ी है। इसके बाद उन्होंने बीएससी करने के बाद इसी क्षेत्र में भविष्य बनाने का फैसला किया। पिता से जिद करके गुड़गांव के एक इंस्टीट्यूट में एनिमेशन प्राइम कोर्स में दाखिला ले लिया, जिसकी पढ़ाई का अब आखिरी दौर चल रहा है।
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‘बकैती’ से मिली अलग पहचान
प्रशांत के मुताबिक एनिमेशन की दुनिया में यूट्यूब पर नई जानकारियां सीखते समय उनकी ऑनलाइन पहचान कानपुर के शिवांक शुक्ला से हुई। दोनों ने मुलाकात के बाद कानपुर की बकैती से जोड़कर एनिमेशन शो बनाने का काम शुरू किया। बकैती नाम का यह शो उन्होंने फेसबुक पेज पीएम टूंस पर बाद में इसी नाम से यू ट्यूब पर जारी किया। अब निजी टीवी चैनल द क्यू पर भी यह धूम मचा रहा है। देहाती और ठेठ कनपुरिया भाषा के साथ ही बदायूं के आसपास की भाषा में कार्टून करेक्टर्स की मजेदार बातों को बच्चों से लेकर बड़े तक चाव से सुनते हैं। प्रशांत के फेसबुक पेज पर करीब 19 लाख फॉलोअर हैं तो लगभग इतने ही लोग यूट्यूब पर बकैती शो के सब्सक्राइबर बन चुके हैं।
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हर महीने लाखों की कमाई
पीएम टूंस के अलावा प्रशांत के यूट्यूब पर चार चैनल और चल रहे हैं। इस तरह फेसबुक और यू ट्यूब पर लगातार बढ़ रहे व्यूज से प्रशांत को लाखों की कमाई भी हो रही है। फेसबुक व यूट्यूब से डॉलर में जो रकम भारत आती है वह टैक्स कटौती के बाद रुपये के रूप में उनके खाते में भेजा जाता है। शो के बीच में ब्रांड प्रमोशन के तौर पर कंपनियों से मिलने वाले विज्ञापन भी कमाई का जरिया हैं। हालांकि प्रशांत अपनी कमाई का सही आंकड़ा बताने से बचते हैं पर कहते हैं कि किसी भी और पेशे में वह शायद ही इतना कमा पाते। दूसरी बात यह कि यह उनका शौक का भी काम है जिसमें ज्यादा से ज्यादा सीखना और खुद को साबित करना उन्हें अच्छा लगता है।
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छोटी टीम बनाई, प्रोडक्शन हाउस खोलने की तैयारी
प्रशांत ने बताया कि काम बढ़ने के साथ ही उन्होंने एक छोटी टीम तैयार कर ली है। इनमें उनके व शिवांक समेत तीन एनिमेटर, तीन डबिंग आर्टिस्ट व दो स्किप्ट राइटर हैं। अब प्रशांत इस टीम को और विस्तार देकर प्रोडक्शन हाउस खोलने की तैयारी में हैं। वह कहते हैं कि ऐसा करने पर उनके पास विदेश से भी एनिमेशन संबंधी काम आने लगेगा।
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प्रशांत का संदेश-नौकरी के पीछे मत दौड़ो, नौकरी देने लायक बनो
नई पीढ़ी को संदेश देने की बात पर प्रशांत कहते हैं कि आज के अधिकतर युवा मोबाइल पर अपना सर्वाधिक वक्त गुजारते हैं पर इसमें वह मनोरंजन या खुद को आनंद देने वाले विषयों पर ही ध्यान देते हैं। अगर युवा चाहें तो अपनी पढ़ाई या किसी खास कॅरिअर की जानकारी इंटरनेट पर सर्च करके उसमें आगे बढ़ने का रास्ता निकाल सकते हैं जैसा उन्होंने किया। वह शिक्षक बनते या कोई निजी नौकरी कर रहे होते तो मिलने वाले वेतन से खर्च पूरे करने में ही उम्र निकल जाती। आज वह अपने शौक को अपना रोजगार बनाकर आमदनी कर रहे हैं बल्कि टीम के दूसरे साथियों को भी रोजगार दे रहे हैं।
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