कुंवरगाव। क्षेत्र के बादल गांव में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का हवन- पूजन के साथ समापन हो गया। कथाव्यास साध्वी उपासना शास्त्री ने अंतिम दिन सुदामा चरित्र की कथा का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि सुदामा संसार में सबसे अनोखे भक्त रहे हैं। वह जीवन में जितने गरीब नजर आए उतने वे मन से धनवान थे। उन्होंने अपने सुख व दुखों को भगवान की इच्छा पर सौंप दिया था। श्रीकृष्ण और सुदामा के मिलन का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। उन्होंने कहा कि जब सुदामा भगवान श्रीकृष्ण ने मिलने आए तो उन्होंने सुदामा के फटे कपड़े नहीं देखे, बल्कि मित्र की भावनाओं को देखा। मनुष्य को अपना कर्म नहीं भूलना चाहिए। अगर सच्चा मित्र है तो श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होना चाहिए। समापन पर साध्वी उपासना शास्त्री ने विधि विधान से हवन कराया। श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। ग्रामवासियों ने गाजे- बाजे के साथ श्रीमद्भागवत कथा की विदाई की। रविवार को भंडारा होगा। संवाद