फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदायूं के उस्ताद राशिद खान का फिर चमका नाम

विज्ञापन
उस्ताद राशिद खान।संवाद - फोटो : BADAUN
विज्ञापन
बदायूं। सहसवान-रामपुर घराने के शास्त्रीय संगीतकार बदायूं के मूल निवासी उस्ताद राशिद खान को पद्म भूषण पुरस्कार की घोषणा से स्थानीय संगीतप्रेमियों में खुशी है। उस्ताद बरसों पहले कोलकता में जाकर बस गए थे। उन्हें पहले पदम श्री पुरस्कार मिल चुका है।
विज्ञापन

उस्ताद राशिद खान के मौसेरे भाई शहर निवासी रामपुर सहसवान घराने के सितार वादक मुजतबा हसन ने बताया कि इस घराने के फनकारों को भारत सरकार द्वारा यह नवां पद्म पुरस्कार मिल रहा है।
बताया कि उस्ताद राशिद खान मूल रूप से बदायूं के कबूलपुरा के निवासी हैं। वहां उनका पैतृक आवास है। यहीं उनका जन्म हुआ। बताया कि राशिद खान के नाना सहसवान रामपुर घराने के पद्म भूषण उस्ताद निसार हुसैन खान थे। इन्हीं से उन्होंने छह साल की उम्र में संगीत की शिक्षा ली। राशिद साहब युवा अवस्था में ही उस्ताद निसार खान के साथ कोलकता चले गए। वहां वह आज भी संगीत रिसर्च अकादमी (आईटीसी) में रहते हैं।
विज्ञापन

राशिद खान देश के प्रतिष्ठित संगीतकार हैं। उन्हें पद्मश्री पुरस्कार मिल चुका है। वह कई फिल्मों में संगीत दे चुके हैं। जब वी मेट का गाना ‘आओगे जब तुम साजना, अंगना फूल खिलेंगे’ उन्हीं का है। इसके अलावा मौसम व माई नेम इज खान फिल्म में भी उनके गाने हैं। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें