बदायूं। बारिश का महीना आषाढ़ को माना जाता है। ज्येष्ठ की तपती धूप के बाद आषाढ़ में बारिश की फुहारें राहत देती हैं। वन्य जीवों के साथ जंगलों और फसलों के लिए भी आषाढ़ की बारिश संजीवनी जैसा काम करती है, पर इस बार आधा आषाढ़ बीत चुका हैं और बारिश न होने से सूखे जैसे हालात हो गए हैं। फसलें सूख रही हैं, अधिकतर सरकारी नलकूप खराब हैं।
इनकी मरम्मत के नाम पर खेल हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार जिले में करीब 50 फीसदी सरकारी नलकूप विभिन्न वजहों से खराब हैं।
जिले में सिंचाई विभाग के तीन खंड हैं। नदियों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। नहरों की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में फसलों की सिंचाई के लिए नलकूपों पर ही निर्भर रहना होता है। डार्क जोन में होने से आसफपुर, इस्लामनगर और अंबियापुर में नलकूपों के बोरिंग पर ही पाबंदी है। जिले में सिंचाई विभाग नलकूप के तीन खंड हैं। प्रथम, द्वितीय और तृतीय तीनों ही खंडों में 1189 नलकूप हैं। इनमें करीब 50 फीसदी नलकूप खराब पड़े हैं।
सूखा जैसे हालातों के बीच फसलों की सिंचाई को लेकर किसान परेशान हैं। धान की फसल के लिए ज्यादा सिंचाई की ज्यादा जरूरत होती है। ऐसे नलकूपों की संख्या भी काफी है तो जलस्तर गिरने के कारण काम नहीं कर रहे। किसान-बार-बार खराब नलकूपों को लेकर अधिकारियों से शिकायतें करते हैं लेकिन इन पर गौर नहीं किया जाता। जो नलकूप काम कर रहे हैं वे भी कम पानी दे रहे हैं। ऐसे में किसानों के सामने फसलों की सिंचाई को लेकर संकट पैदा हो गया है।
महंगे डीजल से सिंचाई संभव नहीं
जिले की ज्यादातर कृषि भूमि भूगर्भ जल से सिंचाई पर ही निर्भर हैं। डीजल के मुकाबले बिजली से चलने वाले नलकूप से सिंचाई सस्ती पड़ती है। एक अनुमान के अनुसार जिले की 1037 ग्राम पंचायतों में चार हजार से ज्यादा निजी नलकूप भी हैं लेकिन काफी संख्या में किसान फसलों की सिंचाई के लिए सरकारी नलकूपों पर निर्भर हैं। सरकारी नलकूपों का उनको लाभ ही नहीं मिल पा रहा।
बिजली भी कर रही किसानों को परेशान
एक ओर सरकारी नलकूप काम नहीं कर रहे वहीं दूसरी ओर निजी नलकूपों के जरिए भी सिंचाई में मुश्किल हो रही है। दरअसल, बिजली सप्लाई का बुरा हाल है। जिला और तहसील मुख्यालयों को छोड़ दें तो गांव-देहात में किसान बिजली संकट को लेकर परेशान हैं। पहले तो शेड्यूल से सप्लाई ही नहीं मिल रही और अगर बिजली सप्लाई मिलती भी है तो लो वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग के कारण निजी नलकूपों में तकनीकी खराबियां आ रही हैं।
मशीनरी में खराबी आती रहती है। नलकूप चलते हैं तो खराब भी होते हैं। जहां से भी खराबी की सूचना मिलती है नलकूप को सही कराकर चालू कराया जाता है। जिले में 1189 सरकारी नलकूप हैं। अगर कहीं खराब है तो उनको ठीक कराया जाएगा। लो वोल्टेज से ज्यादा समस्याएं आती हैं।
- अशोक कुमार गौतमी, एक्सईएन सिंचाई विभाग नलकूप खंड
ये बोले किसान
आधा आषाढ़ बीत चुका हैं लेकिन बारिश नहीं हो रही। सरकारी नलकूपों पर कोई भरोसा नहीं है। कागजों में ही नलकूप खराब होते हैं और इनको सही भी करा दिया जाता है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। - हरपाल सिंह, किसान
खेती-किसानी पहले से ही मुश्किल है। डीजल महंगा हो गया है, बिजली मिल नहीं रही और सरकारी नलकूप खराब पड़े हैं। अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे। बार-बार शिकायत के बाद भी किसानों की कोई सुनवाई नहीं हो रही। - नत्थू, किसान नेता