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कमेटी का चुना गया प्रधान निकला फर्जी

Tue, 07 Jul 2015 11:39 PM IST
मुन्ना लाल गुप्ता/दतागंज (बदायूं)।
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रिजौला ग्राम पंचायत के भाग्य में फर्जीवाड़ा ही लिका है। पहले तीन साल तक एक मंदबुद्धि व्यक्ति ग्राम प्रधान के पद पर काबिज रहा और जब उसके स्थान पर अस्थायी ग्राम प्रधान चुना गया, वो भी फर्जी निकला है। जिस व्यक्ति के नाम से वह चुनाव लड़ा, वह उस चुनावी दंगल में उतरा ही नहीं था। उसके नाम पर वार्ड सदस्य का चुनाव जीता। उसमें भी इस फर्जी व्यक्ति ने जातिप्रमाण पत्र भी फर्जी दाखिल किया था। अब जब ग्राम पंचायत के चुनाव सिर पर हैं, तो इस फर्जी प्रधान का मामला भी प्रशासन तक पहुंच गया है। जिस व्यक्ति के नाम पर मौजूदा अस्थायी प्रधान ने चुनाव लड़ा है, उसी ने शपथ पत्र देकर उसे फर्जी घोषित किया है।
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जिक्र करना जरूरी है कि वर्ष 2010 में हुए ग्राम पंचायत के चुनाव में जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत में शुमार रखने वाली रिजौला के एक प्रभावी परिवार ने षडयंत्र के उसे प्रधान बनवा दिया था। जबकि पर्दे के पीछे यहीं प्रभावी परिवार प्रधानी का सारा कामकाज देखता था। यह मंदबुद्धि प्रधान तीन साल तक इस पद पर काबिज रहा। अंतत: अखबारों में यह मामला प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया। प्रशासन ने मंदबुद्धि प्रधान पोशाकी का मेडिकल समेत कई जांचें कराईं जिनमें उसे मंदबुद्धि करार दिया गया। इसके बाद ग्राम पंचायत का कार्यभार संभालने के लिए प्रशासन ने सदस्यों की एक कमेटी बना दी। इस कमेटी ने करीब 11 माह तक ग्राम पंचायत का काम संभाला। इसके बाद कमेटी के ही एक सदस्य अजय पाल पुत्र हुलासी को अस्थायी प्रधान चुन लिया गया। उन्हें ही प्रधान की सारे अधिकार दे दिए गए, लेकिन यह प्रधान भी फर्जी निकला है। अजय पाल पुत्र हुलासी इसी ग्राम पंचायत के एक मजरा गौरीनगला का निवासी है। इसने मंगलवार को एसडीएम ओपी तिवारी को शपथ पत्र देकर कहा कि उसने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा और वह जाति से कश्यप है। जबकि जिस वार्ड से तथाकथित अजयपाल सदस्य बना है। वो वार्ड अनुसूचित जाति को आरक्षित है। आरोप है कि रिजौला गांव के ही राजवीर पुत्र हुलासी ने उसके नाम का इस्तेमाल करके चुनाव जीता और उसके नाम से फर्जी एससी  का प्रमाणपत्र भी बनवाया है। वो सीधा साधा ग्रामीण है। उसे इसकी जानकारी नहीं थी अब जानकारी मिलने पर उसने इसका खुलासा किया है। प्रमाण के तौर पर अजय पाल ने ग्राम पंचायत की मतदाता सूची पेश की है। जिसमें तथाकथित अजयपाल का फोटो लगा हुआ है और नाम राजवीर पुत्र हुलासी दर्ज है। जमीनी अखिलेखों में भी उसका नाम राजवीर है।
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...कैसे बन गया जाति प्रमाणपत्र
अजय पाल के शपथ पत्र दिए जाने के बाद तहसील प्रशासन भी गंभीर हो गया है। उसके आरोप के बाद तहसील प्रशासन इस बात की जांच करने में जुट गया है आखिर राजवीर को किस तरह फर्जी अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र बना दिया गया। क्या लेखपाल आदि ने बिना जांच पड़ताल के ही उसके एससी का प्रमाणपत्र बनवाने को अपनी रिपोर्ट दे दी। लोग कह रहे हैं यदि इस मामले की सही जांच पड़ताल होती है तो कई राजस्व कर्मी भी लपेटे में आ सकते हैं।  
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पिछले पंचायत चुनाव में किस कदर धांधलीं हुईं थीं उसका ज्वलंत उदाहरण रिजौला ग्राम पंचायत है। पैसे मंदबुद्धि व्यक्ति को चुनाव लडने की इजाजत मिली और कैसे जीत का प्रमाणपत्र जारी हुआ। दुबारा भी वहीं गलती दोहराई गई। फर्जी व्यक्ति को ही प्रधान चुन लिया गया।
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सचिव समेत ब्लाक की भूमिका संदिग्ध
तमाम फजीहत के बाद पोशाकी को मंदबुद्धि घोषित किया गया और यह आइने की तरह साफ हजो गया कि ग्राम पंचायत के खातों का संचालन अन्य व्यक्ति करता था। ऐसे में ग्राम सचिव की भूमिका भी संदिग्ध मानी गई। लेकिन इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई प्रशासन ने कोई नहीं की। इससे अधिकारी भी संदेह के कटघरे में हैं। प्रधान का पूरा कार्यकाल फर्जी बाड़े में ही कट गया और प्रशासन आंखें मूंदे रहा।
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ये मामला मेरे संज्ञान में आया है। जांच कराई जा रही है। जो भी जांच में सामने आएगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
-ओपी तिवारी, एसडीएम दातागंज
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