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बदायूं। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने किशोरी को अगवा कर दरिंदगी करने के मामले में एक मुजरिम को दस साल की कड़ी कैद की सजा सुनाई है। उस पर दस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। अगवा करने में शामिल रहे उसके दो सगे भाइयों, बहनोई और गांव के ही तीन दोस्तों को सात-सात साल की सजा सुनाई गई है।
घटना थाना दातागंज क्षेत्र में 14 फरवरी 2011 को हुई थी। एक व्यक्ति ने दातागंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी नाबालिग बेटी को लहडौरा निवासी कल्लू, कलेंद्र पुत्र नेमसिंह, वीरेश पुत्र सोरन, गैसपाल उर्फ मुकेश पुत्र मुरली, राधाकृष्ण पुत्र बुद्धदेव, करीमगंज भूड़ा गांव निवासी रामतिलक पुत्र सूबेदार अगवा करके ले गए। पुलिस ने विवेचना के दौरान प्रकाश में आए कल्लू के पिता नेमसिंह और भाई अवनीश को भी गिरफ्तार किया। मुख्य आरोपी कल्लू को पुलिस ने 29 अप्रैल 2011 को गिरफ्तार किया। मुकदमा चलने के दौरान नेमसिंह की मौत हो गई। बरामद होने के बाद किशोरी ने अपने बयानों में कहा कि उसे कल्लू अपनी बातों में फंसाकर अन्य आरोपियों की सहायता से गांव से ले गया था। दिल्ली में किराए के मकान में रहकर कल्लू ने उसके साथ दरिंदगी की।
फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश परवेंद्र कुमार शर्मा ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से प्रभारी डीजीसी मुकेश बाबू यादव और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलील को सुनने के बाद दरिंदगी के आरोपी कल्लू को दस साल की कड़ी कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। अगवा कराने में शामिल रहे कल्लू के भाई कलेंद्र, अवनीश और बहनोई राम तिलक के अलावा गांव के ही दोस्त गैसपाल उर्फ मुकेश, राधाकृष्ण और वीरेश को सात-सात की कड़ी कैद सहित दस-दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना जमा होने पर आधी धनराशि पीड़िता को देने का भी कोर्ट ने आदेश दिया है।