शादी के बाद पिता के प्रति बदल गया था बेटे का रवैया, पिता की न सुनकर ससुरालियों की बात को तवज्जो देता था बेटा
खिरिया बाकरपुर में बाप-बेटे के बीच संपत्ति की लड़ाई इस तरह खून-खराबे तक पहुंच जाएगी, यह किसी ने सोचा भी नहीं था। सुुुधीर पूर्व सैनिक सत्यपाल का इकलौता पुत्र है लेकिन शादी के बाद उसका पिता के प्रति रवैया बदल गया। वह पिता से ज्यादा ससुरालियों को तवज्जो देने लगा। इधर, सत्यपाल के भाई रामनाथ और ग्राम प्रधान विक्रम सिंह यादव उनका साथ देते थे। ऐसे में, सुधीर के निशाने पर वे आ गए। सुधीर का ससुराल पक्ष पहले से आपराधिक प्रवृत्ति का है। इसके चलते उसे ससुराल से बल मिल गया। सत्यपाल के मुताबिक, सुधीर ने उसका काफी पैसा हड़प लिया। एटीएम भी ले लिया था। ऐसे में सत्यपाल के हाथ में कोई पैसा नहीं रह गया था, इसीलिए उन्होंने अपनी बेटी पिंकी की शादी करने के लिए सुधीर से पैसा मांगा लेकिन उसने मदद करने से इंकार कर दिया।
विवश होकर सुधीर के पिता ने अपनी संपत्ति की वसीयत अविवाहित बेटी पिंकी के नाम कर दी तो सुधीर और उसकी पत्नी आशा बौखला गए। इन लोगों ने विरोध किया तो सत्यपाल के साथ उनके भाई और भतीजे खड़े हो गए। इस पर खफा सुधीर ने पहले सत्यपाल की मदद करने वालों को निशाना बनाने की सोची। इसके चलते सुधीर ने अपने ससुरालियों से मदद मांगी, हालांकि, सत्यपाल के बाद उसकी संपत्ति पर सुधीर का ही हक था। इसके साथ अविवाहित बहन की शादी भी सुधीर की जिम्मेदारी बनती थी। सुधीर अपनी इस जिम्मेदारी से भाग रहा था लेकिन उसका मकसद किसी भी तरह पिता की संपत्ति पर कब्जा करना था। सुधीर की पत्नी आशा का पिता शिशुपाल, ताऊ अरब सिंह और तहेरे भाई राजवीर कादरचौक थाने के हिस्ट्रीशीटर बदमाश हैं। सुधीर के ससुराल पक्ष के लोगों ने भी रिश्तों को दरकिनार कर आशा और सुधीर के कहने पर खिरिया बाकरपुर में हमला बोलकर सुधीर के चचेरे भाई दानवीर को मौत के घाट उतार दिया और सात लोगों को घायल कर दिया।
छह महीने पहले खुदकुशी कर चुकी है सुधीर की मां
कादरचौक। सुधीर यादव के झगड़े से तंग आकर उसकी मां माया देवी ने करीब छह महीने पहले फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। सुधीर ने पिता की संपत्ति पर पूरी तरह कब्जा करने के बाद मां-बाप को घर से निकाल दिया था। मां ने कई बार उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन नतीजा सिफर रहा। ऐसे में माया देवी ने मौत को गले लगाना उचित समझा।
कोई कुछ समझ पाता उससे पहले बरसा दीं गोलियां
कादरचौक। खिरिया बाकरपुर निवासी सुधीर यादव के ससुरालियों का आपराधिक इतिहास है। उसकी पत्नी आशा का पिता शिशुपाल, ताऊ अरब सिंह और तहेरे भाई राजवीर कादरचौक थाने के हिस्ट्रीशीटर हैं। गांव के लोगों की माने तो विक्रम सिंह, रामनाथ गांव में अपने घेर के पास बैठे थे। हमलावर गाड़ियों में भरकर आए। कोई कुछ समझ पाता उससे पहले नाजायज असलहों से फायरिंग शुरू कर दी। सुधीर का अपने पिता रिटायर्ड फौजी से संपत्ति को लेकर विवाद तो पहले से ही चल रहा था, लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि सुधीर अपने पिता की संपत्ति हड़पने के लिए इस हद तक जा सकता है। शिशुपाल, अरब सिंह अपने सात लड़कों और 10-12 अज्ञात लोगों के साथ खिरिया बाकरपुर पहुंचे। घेर में बैठे सत्यपाल पक्ष के लोगों को लगा कि शायद यह लोग कोई बात करने आए हैं, लेकिन इन लोगों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। करीब 45 मिनट तक फायरिंग होती रही। इससे गांव में भी दहशत फैल गई।
पुलिस की सक्रियता से बच गई कई लोगों की जान
कादरचौक। खूनी संघर्ष की इस वारदात में कई लोगों की जान जा सकती थी, लेकिन पुलिस की सक्रियता के चलते कई लोगों की जान बच गई। गांव के लोगों की मानें तो एसओ कादरचौक बीपी सिंह ने फोर्स के साथ गांव पहुंचते ही हमलावरों की घेराबंदी कर ली। मौके से बाकी लोग तो भागने में कामयाब हो गए। लेकिन सुधीर, उसकी पत्नी आशा और साले कुंवरपाल को दबोच लिया।
ग्रामीणों के दबाव पर सुधीर के घर की तलाशी
कादरचौक। घटना की जानकारी मिलने पर एसएसपी चंद्र प्रकाश भी फोर्स के साथ गांव पहुंच गए। गांव के लोगों ने एसएसपी की गाड़ी को घेर लिया और सुधीर यादव के घर की तलाशी की मांग करने लगे। उनका कहना था कि सुधीर के घर में असलह और गोला-बारूद रखे हुए हैं। इसके बाद पुलिस ने सुधीर के घर के ताले तोड़कर यहां तलाशी ली। हालांकि, पुलिस को यहां कुछ नहीं मिला।
जिला अस्पताल को भी बना दिया गया छावनी
बदायूं। खिरिया बाकरपुर के घायल जिला अस्पताल पहुंचे तो जिला अस्पताल को भी छावनी में तब्दील कर दिया गया। पुलिस को आशंका थी कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। ऐसे में अस्पताल में हंगामा भी हो सकता था। फोर्स के साथ इंस्पेक्टर कोतवाली लोकेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस राजीव शर्मा जिला अस्पताल में डटे रहे। एसएसपी चंद्र प्रकाश ने भी जिला अस्पताल पहुंच कर हालात का जायजा लिया।