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कहां से आया जहर ?

Tue, 26 Apr 2016 12:20 AM IST
बदायूं, ब्यूरो
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हत्या - फोटो : अमर उजाला
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बैरक आठ से 12 नंबर में शिफ्ट कर दिया था तुकमेश को
पत्र में लिखा कि जेल अधिकारी करते थे परेशान 
22 को बिगड़ी थी तबीयत
  तुकमेश यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर गौर करें तो उसकी मौत की वजह विषाक्त खाने से बताई गई। अब सवाल यह कि विषाक्त जेल में आया कहां से? 
तुकमेश की मौत पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। वह अपने ताऊ चंद्रकेश के साथ ही बैरक नंबर आठ में था। कुछ  दिन पहले ही उसको यहां से हटाकर बैरक नंबर 12 में भेज दिया गया। परिवार वालों का आरोप है कि मुलाकात के दौरान तुकमेश ने उनसे कहा था कि जिस दिन एक जेल अधिकारी उसे धमकाया था कि जिस वह रहेंगे, उसकी हत्या करा देंगे। उनका यह भी आरोप है कि जिसकी हत्या के मामले तुकमेश अंदर था, उस पक्ष से संबंधित ेनंदरौली के मुनीश कुमार, राजेश कुमार और उदयवीर का डिप्टी जेलर और जेलर के घरों पर आना-जाना था। 
 तुकमेश की मौत के बाद हालत बिगड़ने की वजह से अस्पताल में भर्ती कराए गए तुकमेश के ताऊ चंद्रकेश की बात पर गौर करें तो 22 अप्रैल को जेल में दौरा पड़ने से तुकमेश की हालत बिगड़ गई थी। 
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बर्दाश्त से बाहर....
अपने तहेरे भाई योगेश यादव को लिखे चार पन्नों के खत में तुकमेश ने लिखआ कि कभी-कभी वह सोचता है कि खुदकुशी कर ले। नए डिप्टी जेलर दीपक  चौहान का व्यवहार उसके प्रति बेहद खराब है। डिप्टी जेलर लगातार उसकी  बेइज्जती कर रहा है। पानी सिर से ऊपर जा चुका है। अब सब कुछ बर्दाश्त से बाहर हो रहा है। अगर मुझे जेल में कुछ होता है, तो जेल अधीक्षक एलएन दोहरे, डिप्टी जेलर दीपक चौहान और सुनील गौतम इसके जिम्मेदार होंगे। जेल में मिल रही जिल्लत से बेहतर है कि मैं मौत को गले लगा लूं, लेकिन मैं इतना बुजदिल नहीं हूं। मेरी सोच मजबूत होती जा रही है।
(पुलिस को प्राप्त खत का मजमून)

तुकमेश की हालत 22 अप्रैल को बिगड़ी थी। दौरा पड़ने से वह जमीन पर गिर गया था। कुछ चोटें भी आई थीं। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 24 घंटे बाद हालत सामान्य होने पर उसे वापस जेल शिफ्ट कर दिया गया था। इसी तरह से रविवार रात उसको अचानक दौरा पड़ा था। जिला अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। मामले की जांच की जा रही है।
-अरविंद पांडेय, जेलर/प्रभारी जेल अधीक्षक
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529 क्षमता वाली जेल में ठूंसे गए हैं दो हजार बंदी-कैदी
बदायूं। बंदियों और कैदियों के साथ जेल में हो रहा सलूक उन्हें जेल प्रशासन के खिलाफ बगावत की ओर मोड़ सकता है। अगर ऐसा होता है, तो हालात संभालने मुश्किल होंगे। यहां पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई माफिया को भी रखा गया है। ओवरलोड जेल में स्टाफ की भी किल्लत बनी हुई है। जिला जेल की क्षमता 529 बंदियों की है, लेकिन यहां बंदियों की तादाद करीब 2000 है। कुछ महीने पहले जेल अधीक्षक एलएन दोहरे और डिप्टी जेलर सुनील गौतम के खिलाफ बंदी और कैदी भूख हड़ताल पर जा चुके हैं। उस वक्त भी जेल में बिलाल नाम के एक बंदी की संदिग्ध मौत हुई थी। मामला किसी तरह से निपटा लिया गया था। 
चार महीने में चार मौत
बदायूं। चार महीनों पर गौर करें, तो जिला जेल में हर इस दौरान चार बंदियों और कैदियों की मौत हो चुकी है। जेल प्रशासन हर बार कार्रवाई से बचता रहा। 12 दिसंबर 2015 को बिसौली के कालूपुर निवासी सजायाफ्ता सौदान सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में जेल में मौत हो गई थी। यह प्रकरण ठंडा होने से पहले ही 25 दिसंबर 2015 को बिनावर थाने के गांव गुरुपुरी चंदन के बिलाल चौधरी नाम के बंदी की मौत हो गई। कुछ दिन के बाद ही 24 जनवरी 2016 को सजायाफ्ता उसहैत थाने के गांव पदम नगला के नेकसे उर्फ जय प्रकाश की जेल में मौत हो गई। ताजा मामला तुकमेश का है।
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अधीक्षक, डिप्टी जेलरों पर जेल में उगाही का आरोप
जेल अधीक्षक एलएन दोहरे और डिप्टी जेलरों पर जेल में बंदियों-कैदियों से उगाही के साथ उनके साथ जानवरों जैसा सलूक करने का आरोप भी लगा है। चंद्रकेश यादव का कहना है कि जेल मेन्युअल अफसरों के लिए नहीं हैं। जेल में बेहद घटिया खाना दिया जाता है। बंदी और कैदी परेशान हैं। जेल प्रशासन की हरकतों के चलते जेल में कभी भी बगावत हो सकती है।
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