कछला में सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान के दौरान डूबे श्रद्धालुओं में मंगलवार को प्राइवेट गोताखोरों ने एक और शव निकाल लिया। शव राजस्थान के धौलपुर के रेवती का बताया गया है। घरवाले उसका शव बगैर पोस्टमार्टम कराए घर ले गए। इसके साथ ही मृतकों की संख्या आठ हो गई है। इस बीच, दूसरे दिन एडीएम प्रशासन और एसपी सिटी मौके पर पहुंचे। उन्होंने हादसों के बारे में प्राइवेट गोताखोरों से जानकारी ली।
गंगा स्नान करते वक्त डूब जाने से मृत रेवती (22) पुत्र देवदत्त का शव मंगलवार करीब नौ बजे पुल के पिलर में फंसा मिला। वह राजस्थान में धौलपुर जिले के मनिया थाना क्षेत्र के गांव हनौता का निवासी था। मृतक के घरवाले हादसे के बाद से प्राइवेट गोताखोरों के संपर्क में थे। हनौता से उसके परिवार के सदस्यों के साथ नाते-रिश्तेदार भी सोमवार रात में ही कछला आ गए थे। वह अपने मामा धर्मवीर के साथ गंगा स्नान के लिए आया था। घरवालों में मृतक के चाचा रामदास ने बताया कि रेवती शादीशुदा था। उसके दो बच्चे हैं।
बता दें कि सोमवती अमावस्या पर गंगा में नहाते वक्त करीब 18 लोग डूब गए थे। सोमवार को प्राइवेट गोताखोरों ने सात शव बाहर निकाल लिए थे, लेकिन रेवती और पांच साल की बालिका रौनक नहीं मिली। रौनक भी धौलपुर जिले में गुलाबनगर की ऑफीसर कॉलोनी निवासी मुनीश शर्मा की बेटी थी। घाट पर दूसरे दिन उसका कोई परिजन नजर नहीं आया। कछला चौकी इंचार्ज मानपाल सिंह की मानें तो उसके बारे में कोई और जानकारी नहीं मिल पाई है।
एडीएम प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव और एसपी सिटी अनिल यादव ने दूसरे दिन कछला पहुंचकर मौका मुआयना किया। उन्होंने गोताखोरों से बात कर हादसों के बारे में जानकारी भी हासिल की।
गोताखोरों पर बहाए 20 हजार रुपये
उझानी। रेवती का शव खोजने के लिए हालांकि करीब 30-35 ग्रामीण उसके गांव से सोमवार शाम को ही पहुंच गए थे, लेकिन शव का पता नहीं लग पाया। लाश बरामद होने के बाद रेवती के नाना बद्री प्रसाद ने बताया कि पहले दिन करीब आठ हजार रुपया गोताखोरों पर खर्च कर दिया। रात में पांच हजार रुपये में तय करके बुलाए गए गोताखोरों को भी सफलता नहीं मिली। दूसरे दिन गोताखोरों की दो टोलियों की तय रकम पर मदद ली गई। लाश पाने के लिए करीब 20 हजार रुपया खर्चा हो गया।
सीमा विवाद में फंसाकर की अनसुनी
सोमवती अमावस्या पर भारी भीड़ जुटने का अनुमान कछला गंगाघाट से जुड़ी बदायूं और कासगंज की पुलिस के साथ प्रशासनिक अफसरों को भी था। उन्हें यह भी पता था कि सर्वाधिक भीड़ कासगंज वाले छोर पर रहेगी, लेकिन ऐसा कोई इंतजाम नहीं किया जो श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिहाज से सही साबित हो। स्नान करते वक्त डूबने से मृत श्रद्धालुओं की मौत पर दोनों जिलों की पुलिस के बीच सीमा विवाद बरकरार रहा। मृतकों के घरवालों की मदद की गुहार भी इसी विवाद में फंसा कर अनसुनी कर दी गई।
कछला गंगाघाट पर खासकर स्नान पर्व वाले दिन सीमा विवाद कोई नया नहीं है। कासगंज वाले छोर पर बसा पंखिया नगला गांव बदायूं जिले के राजस्व इलाके में शामिल है, लेकिन गंगाघाट कासगंज जिले की सोरों कोतवाली क्षेत्र का हिस्सा है। बदायूं और कासगंज जिले की पुलिस की कछला में चौकियां हैं। सोमवती अमावस्या पर डूबे श्रद्धालुओं के घरवालों ने जब भी मदद की गुहार लगाई, तब-तब उन्हें कासगंज वाले छोर पर कोई पुलिस कर्मी नजर नहीं आया। सूचना के बाद हालांकि बदायूं की कछला चौकी से पुलिस कर्मी पहुंचे जरुर, लेकिन उन्होंने भी कासगंज क्षेत्र के चौकी इंचार्ज को कॉल करके इतिश्री कर दी।
यहां तक कि मृतक संख्या को लेकर भी पसोपेश का माहौल कायम रहा था। बदायूं के पुलिस और प्रशासनिक अफसर देर शाम तक यही कहकर मृतक संख्या चार बताते रहे कि ज्यादा जानकारी कासगंज पुलिस से पता लग पाएगी। सीमा विवाद के पचड़े में पडने की बजाय एक अज्ञात शव को छोड़ बाकी सभी शव उनके घरवाले अपने साथ ही ले गए।
इधर, लापरवाही के दूसरे पहलू पर गौर करें तो कछला नगर पंचायत प्रशासन ने कासगंज वाले छोर के घाटों पर कोई व्यवस्था नहीं कराई थी। श्रद्धालुओं को सुविधा और सुरक्षा का ख्याल रखा जाता तो नौ श्रद्धालुओं को जान से हाथ नहीं धोना पड़ता।
बेतरतीब खनन ने बढ़ाई गंगा में गहराई
कछला में खनन का यूं तो इस साल अधिकृत प्वाइंट है, लेकिन पिछले साल अवैध रूप से खनन कार्य जोरों पर चला था। हर बार ही जेसीबी का इस्तेमाल किया गया। बालू की खोदाई की वजह से पिछले साल हुए गड्ढों तक जल का प्रवाह पहुंच जाने से किसी को अहसास भी नहीं हो पाता कि गहराई कहां अधिक है। नहाते वक्त गहरे में पहुंच जाने से स्नानार्थियों का बच पाना मुश्किल हो जाता है।
...तो फिर गोताखोरों ने निकाले थे 11 शव
उझानी। कछला गंगाघाट पर कासगंज वाले छोर पर मिले गोताखोरों में अजमेरी की मानें तो गंगा में कई श्रद्धालु डूबे थे। मदद के लिए हम लोग पहले से मौजूद थे। प्रशासन भले ही मृतक संख्या साफ नहीं बता पा रहा है, लेकिन अजमेरी ने 11 शव निकालने का दावा किया है।
अध्यक्ष, नगर पंचायत कछला पुष्पा देवी लौनिया चौहान ने बताया कि कछला के दोनों छोर पर सुविधा मुहैया कराने के लिए स्थानीय स्तर से पहले हर बार इंतजाम कराए थे, लेकिन इस बार ईओ के अभाव में विशेष व्यवस्था प्रभावित हो गई। वैसे भी व्यवस्था पर खर्च की गई धनराशि के बिलों को अभी तक भुगतान लंबित है।
सीओ, उझानी सतीशचंद्र शर्मा ने बताया कि बदायूं जिले की पुलिस सीमा में कोई भी श्रद्धालु नहीं डूबा था। यह जरुर रहा कि डूबे कुछेक श्रद्धालुओं के शव निकाल कर हमारे जिले की सीमा में रखवा दिए गए थे। जो अज्ञात शव मिला, उसका पोस्टमार्टम भी कासगंज पुलिस ने कराया है। बदायूं की पुलिस को पड़ोसी जिले के घाट पर भी निगरानी करनी पड़ी थी।