साक्ष्य मिटाने की कोशिश, खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने परिसर खंगाला तो मिला सैंपल
प्रथम दृष्टया घटिया क्वालिटी का पाया गया चाउमीन का सैंपल
स्कूल प्रबंधन और कैंटीन संचालक ने अपनी लापरवाही के साक्ष्यों को मिटाने की पूरी कोशिश की। प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम के स्कूल पहुंचने से पहले ही कैंटीन में रखे सभी फास्ट फूड को कूड़े के ढेर में फिकवा दिया। यहां पहुंची टीमों ने जब परिसर को खंगाला तो चाउमीन कूड़े के ढेर में पड़ी मिली। उसका सैंपल भर लिया गया। कैंटीन संचालक विनीत से भी पूछताछ की गई।
चाऊमीन खाने से 24 बच्चों के बीमार होने की खबर बिना प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को दिए ही स्कूल प्रबंधन सब कुछ रफा-दफा करना चाहता था। डीएम अनिता श्रीवास्तव को इस बारे में पता लगा तो उन्होंने प्रारंभिक जांच के लिए सिटी मजिस्ट्रेट और खाद्य निरीक्षक को भेजा। स्कूल में जांच को टीम पहुंचने की सूचना पर स्कूल प्रबंधन सबूत मिटाने में जुट गया। सिटी मजिस्ट्रेट श्रीराम यादव ने बताया कि चाउमीन समेत कैंटीन के फास्ट फूड कूड़े के ढेर में फेक दिए थे। तलाशी के बाद चाऊमीन का नमूना कूड़े के ढेर से लेकर जांच को भेजा गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की माने तो प्रथम दृष्टया जांच में चाउमीन घटिया स्तर की पाई गई है।
सूचना न देने पर सीएमओ ने अस्पताल से जवाब मांगा
बदायूं। स्कूल प्रबंधन और निजी नर्सिंग होम की लापरवाही को सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा ने भी गंभीरता से लिया है। उन्होंने फूड प्वाइजिंग से 24 बच्चों के बीमार होने की सूचना न देने के लिए डीएम रोड स्थित डॉ. संतोख सिंह के निजी नर्सिंग होम को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है। इसके साथ ही सीएमओ ने स्कूलों में फास्ट फूड की बिक्री पर पाबंदी लगाने की बात भी कही है। चाउमीन खाने से 24 बच्चों के बीमार होने की सूचना पर सीएमओ ने तुरंत ही संक्रामक रोग सेल प्रभारी डॉ. कौशल गुप्ता के नेतृत्व में एक टीम को बीआरबी स्कूल भेज दिया। टीम यहां पहुंची तो पता लगा कि बीमार बच्चे डॉ. संतोख सिंह अस्पताल में भर्ती हैं। इसके बाद टीम डॉ. संतोख सिंह के अस्पताल पहुंची। बच्चे यहां से भी जा चुके थे। संक्रामक रोग सेल प्रभारी डॉ. कौशल गुप्ता और डॉ. वीरेंद्र सिंह ने यहां पूछताछ की। सीएमओ का कहना है कि इस बारे में जानकारी न देने के लिए नर्सिंग होम से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों में फास्ट फूड पर जब तक पाबंदी नहीं लगती इस तरह की घटनाओं की संभावना बनी रहेगी।
कैंटीन का नहीं है कोई लाइसेंस और अनुबंध
बदायूं। प्रशासन, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा विभाग को प्रारंभिक पड़ताल में पता लगा है कि बीआरबी स्कूल में कैंटीन चलाने वाले विनीत नाम के व्यक्ति का न तो कोई रजिस्ट्रेशन है और न ही उसका स्कूल से कैंटीन चलाने संबंधी कोई अधिकृत अनुबंध है। ऐसे में इस पर भी जांच टीम ने पड़ताल शुरू कर दी है।
मिड-डे-मील खाने से बीमार हुए थे 35 बच्चे
बदायूं। दातागंज ब्लॉक के गांव अगोड़ी स्थित प्राथमिक विद्यालय में भी वर्ष 2014 में मिड-डे-मील खाने 35 बच्चे बीमार हुए थे। इस घटना की यादें एक बार फिर से ताजा हो गईं। अधिकारियों को जब पता लगा कि बीआरबी स्कूल में चाउमीन खाने से 24 बच्चे बीमार हो गए हैं तो पूरे प्रशासन में हड़कंप मच गया।
स्कूल के प्रबंधक, प्रधानाचार्य और कैंटीन संचालक दोषी
कमेटी ने डीएम को दी रिपोर्ट, स्कूल पर कार्रवाई तय
चाउमीन खाने से 24 बच्चों के बीमार होने के मामले में डीएम की ओर से बनाई गई अधिकारियों की जांच कमेटी ने शुक्रवार देर रात अपनी रिपोर्ट तैयार कर डीएम अनिता श्रीवास्तव को सौंप दी। जांच कमेटी ने मामले में स्कूल प्रबंधक, प्रधानाचार्य और कैंटीन संचालक को दोषी पाया गया है। इन सभी पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
स्कूल में बच्चों के बीमार होने की जानकारी मिलने पर डीएम ने चार सदस्यों की जांच कमेटी बना दी थी। इसमें सिटी मजिस्ट्रेट श्रीराम यादव, डीआईओएस राकेश कुमार, बीएसए पीसी यादव और जिला अभिहीत अधिकारी संजय शर्मा को शामिल किया गया। सीएमओ ने भी संक्रामक रोग सेल प्रभारी डॉ. कौशल गुप्ता को जांच का आदेश दिया। देर शाम सिटी मजिस्ट्रेट श्रीराम यादव ने जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी। इसमें प्रबंधक सुभाष बत्रा, प्रधानाचार्य राजीव राठौर और कैंटीन संचालक विनीत को स्कूल में नियम विरुद्ध ढंग से कैंटीन संचालन का दोषी बताया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि डीएम के आदेश के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्कूल में मिले तीन रसोई गैस सिलेंडर सील
स्कूल की कैंटीन में तीन रसोई गैस सिलेंडर भी मिले। जिला पूर्ति अधिकारी रामेंद्र प्रताप सिंह ने इनको सील कर दिया है। उनका कहना है कि कैंटीन में गलत तरीके से घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल हो रहा था। जांच कराई जाएगी। स्कूल में अग्निशमन की भी पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं पाई गईं।