अचौरा के निर्माणाधीन धर्मस्थल को लेकर हुए बवाल के मामले में जांच कर रहे इंसपेक्टर मुजरिया ने घटनाक्रम के फोटो और वीडियो क्लिपिंग जुटानी शुरू कर दी है। जांच पूरी होने में अभी वक्त लगेगा। इसकी वजह भले ही दोनों पक्ष के लोगों को राहत पहुंचाना रहे, लेकिन तब बवाल के दौरान नामजद गिरफ्तारी से बच सकते हैं।
कोतवाली क्षेत्र के गांव अचौरा में निर्माणाधीन धर्मस्थल को लेकर 10 दिन पहले जमकर बवाल हुआ था। बवाल की वजह से भी अफसर अच्छी तरह वाकिफ हैं, लेकिन पीएसी और पुलिस फोर्स लगातार हालात पर नजर रखे हुए है। दो दिन पहले विवादित परिसर में बाहरी लोगों के पहुंचने की आशंका पर पुलिस की मुस्तैदी ने ही हालात सामान्य बरकरार रखने अहम भूमिका अदा की थी। बता दें कि एसएसपी सौमित्र यादव बवाल की वजह जानने के लिए इंसपेक्टर मुजरिया अरुण कुमार सिंह को जांच सौंप चुके हैं। जांच की कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए उन्होंने घटना से जुड़े वीडियो क्लिप और फोटो भी जुटाए हैं।
जांच के बारे में पुलिस सूत्रों की मानें तो सच्चाई तक पहुंचने के लिए प्रत्येक उस बिंदु पर गौर किया जाएगा जो हालात खराब करने में सहायक बने। जांच पूरी होने में अभी एक-डेढ़ महीना भी लग सकता है। समुदाय विशेष के त्योहार के मद्देनजर पुलिस ऐसा कोई कदम उठाना नहीं चाहती, जो शांति-व्यवस्था को प्रभावित करे। बवाल के दौरान कोतवाल देवराज राठी ने अपनी ओर से एक सौ से अधिक उपद्रवियों पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कराया था। इसमें 48 नामजद भी शामिल थे। नामजदों मेें से कोतवाली पुलिस बवाल के अगले दिन ही दोनों पक्ष के 35 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
ग्रामीणों के अंदर से डर निकालने की कोशिश
पुलिस ने अचौरा बवाल के मामले में नरम रुख अख्तियार कर लिया है। वह चाहती है कि कार्रवाई के डर से फरार दोनों पक्ष के ग्रामीण घरों पर लौट कर खेतीबाड़ी या फिर अपनी रोजी-रोटी के संसाधनों की ओर ध्यान दें। कोतवाल देवराज राठी ने बताया कि पुलिस कार्रवाई के नाम पर किसी को भी परेशान नहीं किया जाएगा।
जांच पूरी होने में अभी कुछ वक्त लगेगा। दोनों पक्ष के ज्यादातर लोग फरार हैं। जांच में उनके बयान भी होने हैं। बयान तभी हो पाएंगे जब ग्रामीण घर पर मिलें। बवाल के बारे में काफी हद तक जानकारी भी हासिल हो चुकी है। - अरुण कुमार सिंह, जांच अधिकारी।