शहर के मोहल्ला खंडसारी में आए दिन दो गुटों में फायरिंग की वजह ‘पोटली’ का कारोबार है। जानवरों के मांस के एक विशेष हिस्से को मांस कारोबारी ‘पोटली’ कहते हैं। स्थानीय स्तर पर इसकी कीमत सौ से दो सौ रुपये के बीच है। मांस के बड़े कारोबारी ‘पोटली’ का एक्सपोर्ट करते हैं। एक्सपोर्ट करने पर एक पोटली की कीमत आठ से दस हजार रुपये मिलती है। शहर में ‘पोटली’ के दो खरीददार हैं। इन्हीं दोनों गुटों में आये दिन फायरिंग होती है। इस प्रतिद्वंदता को लेकर खंडसारी मोहल्ले में डबल मर्डर भी हो चुका है।
शहर में कोई स्लाटर हाउस नहीं है। मोहल्ला खंडसारी, नई सराय, शहवाजपुर समेत कई जगह पर मांस के लिए जानवरों को काटा जाता है। जानवरों के मांस के एक विशेष हिस्से को एक्सपोर्ट के लिए रखा जाता है। इसे ‘पोटली’ कहते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक ‘पोटली’ की कीमत दस हजार रुपये तक मिलती है। मोहल्ला खंडसारी में ‘पोटली’ के दो कारोबारी हैं। दोनों के बीच खरीद को लेकर प्रतिद्वंदता रहती है। नवंबर 2013 में खंडसारी मोहल्ले में डबल मर्डर का मामला भी ‘पोटली’ के कारोबार से जुड़ा हुआ निकला था। एक करोबारी ने दूसरे को फंसाने के लिए भाई-बहन की हत्या कर दी थी। दूसरा गुट इस मामले में गवाह बन गया। दो साल में दोनों गुटों के बीच कई बार फायरिंग हो चुकी है। स्थिति गैंगवार की बनी हुई है। दो दिन पहले ही दोनों गुटों में फायरिंग में चार लोग घायल हो गए थे।
इस तरह होता है कारोबार
शहर में कटने वाले जानवरों के शरीर से मिलने वाले मांस के एक विशेष हिस्से को ‘पोटली’ कहते हैं। स्थानीय स्तर पर कारोबारी इसे सौ से दौ सौ रुपये में खरीद लेते हैं। यहां से इसे रामपुर और मुरादाबाद भेजा जाता है। वहां से ‘पोटली’ को विदेशों में एक्टसपोर्ट कर दिया जाता है। जो ‘पोटली’ स्थानीय स्तर पर सौ रुपये में मिल जाती है उसकी अंतराष्ट्रीय स्तर पर कीमत दस हजार रुपये तक पहुंच जाती है।
फायरिंग की घटनाओं के पीछे पोटली का कारोबार एक कारण है, यह सुनने में आया है। कारोबार में ऐसी प्रतिद्वंदता नहीं होनी चाहिए कि बात गैंगवार तक पहुंच जाए। जो लोग भी ऐसा कर रहे हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। -लल्लन सिंह, एसपी सिटी