फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मथुरा पुलिस की टीम ने डाला बदायूं में डेरा

Sun, 05 Jun 2016 11:15 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
मथुरा के जवाहर बाग कांड के बाद सुर्खियों में आए हजरतपुर थाने के गांव गढ़िया शाहपुर निवासी कथित सत्याग्रही राकेश गुप्ता की लोकेशन ट्रेस करने में पुलिस और खुफिया इकाई नाकाम साबित हो रही है। उसकी तलाश में मथुरा पुलिस की एक टीम ने बदायूं में डेरा जमा लिया है। स्थानीय पुलिस और खुफिया इकाई राकेश गुप्ता के नाते-रिश्तेदारों की सूची बना रही है। 
विज्ञापन

मूलरूप से गढ़िया शाहपुर का निवासी राकेश गुप्ता जवाहर बाग कांड के बाद से ही फरार है। उसके साथी रामवृक्ष यादव की लाश बरामद होने के बाद पुलिस के सामने राकेश गुप्ता को तलाशना किसी चुनौती से कम नहीं है। पुलिस सूत्रों की मानें तो राकेश गुप्ता के परिवार वालों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाए गए हैं। सहकारिता विभाग में सचिव राकेश गुप्ता का अपने पैतृक गांव से ज्यादा ताल्लुक नहीं था। कई साल से वह शहर के सिविल लाइंस इलाके में परिवार के साथ रह रहा था। यहां भी पड़ोसियों से ज्यादा नजदीकी नहीं रखता था। उसके शहर स्थित घर में ताला लटक रहा है। 
----
राकेश गुप्ता की तलाश की जा रही है। उच्च स्तर से जो भी निर्देश मिल रहे हैं पुलिस उन पर काम कर रही है। आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
-श्योराज सिंह, सीओ दातागंज
----
कछला घाट पर विसर्जित की गईं अस्थियां
उझानी। मथुरा के जवाहर बाग में शहीद हुए एसपी मुकुल द्विवेदी की अस्थियां रविवार को कछला गंगा घाट पर विसर्जित की गईं। सीओ कासगंज और कासगंज कोतवाली पुलिस के साथ मुकुल द्विवेदी के बड़े भाई प्रफुल्ल द्विवेदी और बेटा कोष्तो द्विवेदी दोपहर कछला घाट पर पहुंचे। यहां वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच ब्राह्मणों ने अस्थियां गंगा में विसर्जित कराईं। इसके बाद परिवार के लोग यहां से वापस हो गए। 
विज्ञापन

-----
जवाहर बाग में गुम हुए बक्सेना के कई परिवार
दातागंज। जवाहर बाग कांड के पास दातागंज और हजरतपुर थाना क्षेत्र के कई परिवरों का अता-पता नहीं है। चार परिवार ऐसे भी हैं जो इस कांड के बाद वापस अपने घरों को लौट आए हैं, लेकिन यह डरे और सहमे हुए हैं। बक्सेना निवासी रामचरन की मां का भी घटना के बाद पता नहीं है। गढ़िया शाहपुर के रामऔतार, बक्सेना के बहोरन, नेकराज समेत कई परिवारों की मथुरा से वापसी हो गई है। 
-----
चार महीने पहले कादरचौक में जुटे थे कथित सत्याग्रही
जीवन संगत नाम से एक गुट का तीन दिन चला था कार्यक्रम
कादरचौक। जिले का शायद ही कोई इलाका ऐसा होगा जहां जय गुरुदेव बाबा के अनुयायी न हों। यह बात अलग है कि अनुयायी गई गुटों में बंटे हुए हैं। इनमें एक गुट जीवत संगत नाम से है। यह गुट जय गुरुदेव बाबा को जीवित मानता है। चार महीने पहले फरवरी में जीवत संगत गुट ने कादरचौक में तीन दिन का सत्संग किया था। इसमें दावा किया गया था कि बाबा अभी जीवित हैं।
जयगुरु देव के अनुयायी चार गुटों में बंटे हुए हैं। इनमें एक गुट रामवृक्ष यादव का था। एक गुट के मुखिया राधाकांत तिवारी उज्जैन में आश्रम बनाकर रहते हैं। एक गुट बाबाकके उत्तरएाधिकारी पंकज यादव का है। पंकज यादव को बाबा का ड्राइवर था, इसे उनका उत्तराधिकारी बना दिया गया था। रामवृक्ष यादव खुद को बाबा का उत्तराधिकारी होने का दावा करता था। गौर करने वाली बात यह है कि सभी गुटों ने अपने-अपने पक्ष में अनुयायी जुटाने का अभियान छेड़ रखा था। कुल मिलाकर सभी की नजर बाबा की अकूत संपत्ति पर है।
----
अमीर हो गए कई अनुयायी
कादरचौक। बाबा के सतसंग और अन्य आयोजनों के लिए मोटा चंदा जुटाया जाता रहा है। इससे कई अनुयायी तो करोड़पति को गए हैं। इनमें ही एक नाम राकेश गुप्ता का भी है। इलाके के तमाम लोग रामवृक्ष यादव और राकेश गुप्ता के संपर्क में भी रहे हैं। जवाहर बाग कांड के बाद पुलिस यहां भी अनुयायियों पर नजर रखने लगी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें