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एक ही रात में मार दिए दुर्लभ प्रजाति के सैकड़ों कछुए

Sat, 03 Dec 2016 11:38 PM IST
ब्यूरो/बदायूं
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एक ही रात में मार दिए दुर्लभ प्रजाति के सैकड़ों कछुए 
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 जिले में दुलर्भ प्रजाति के वन्य जीवों पर खतरा मंडरा रहा है। दातागंज कोतवाली के गांव गढ़ा के तालाब में रहस्यमय ढंग से एक ही रात में दुर्लभ प्रजाति के सैकड़ों कछुए मर गए। शनिवार सुबह जब गांव के लोगों ने तालाब का नजारा देखा तो हैरान रह गए। खबर वन विभाग के अधिकारियों को दी गई। लकिन शाम तक वन विभाग का कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। गांव के लोग आशंका जता रहे हैं कि दुर्लभ प्रजाति के कछुओं की तस्करी करने वालों ने तालाब में जहरीला पदार्थ डाल कर कछुओं को मारा है। तस्कर मरे हुए कछुओं को ले जाने में कामयाब नहीं हो सके। 
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दातागंज तहसील में अरिल नदी के पास बसे गांव गढ़ा में एक तालाब है। राजस्व रिकार्ड के मुताबिक 
तालाब का रकबा करीब दो बीघा का है। अरिल नदी के पास होने की वजह से इस तालाब में सैकड़ों की तादाद में दुर्लभ प्रजाति के कछुए भी रहते थे। शनिवार सुबह को गांव के लोग जब घरों से खेतों पर जाने के लिए निकले तो देखा कि गांव के बाहर तालाब में सैकड़ों की तादाद में दुलर्भ प्रजाति के कछुए पानी की सतह पर उतरा रहे हैं। गांव के लोगों ने रेंजर दातार बाबू को भी खबर दी। लेकिन, उन्होंने नजरअंदाज कर दिया। शाम तक तालाब के पास गांव के लोगों की भीड़ जमी रही। गांव के लोगों का भी मानना है कि यह तस्करों की हरकत हो सकती है। इलाके में दुर्लभ प्रजाति के कछुओं की तस्करी करने वाला गिरोह सक्रिय है। वन विभाग इसको लेकर गंभीर नहीं है। 

रेंजर शाम तक कहते रहे, सूचना नहीं है
दातागंज। रेंज में वन्य जीवों की सुरक्षा और देखरेख का जिम्मा वन विभाग के रेंजर दातार बाबू पर है। दुलर्भ प्रजाति के सैकड़ों कछुओं को मार दिए जाने की घटना के बाद भी रेंजर को शाम तक इस बारे में खबर ही नहीं मिली। वह शाम तक कहते रहे कि इस बारे में उनको जानकारी नहीं है। गौर करने वाली बात है कि दातागंज तहसील गंगा, रामगंगा और अरिल नदी की कटरी से लगी हुई है। इलाके में दुर्लभ प्रजाति के ब्लैक वक भी बहुतायत में हैं। पूरा इलाका वन्य संपदा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होने के बाद भी वन विभाग गंभीर नजर नहीं आ रहा है। 
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जन्तु विज्ञानी की राय
कछुओं की काफी प्रजातियां हैं। तालाबों में कछुओं की 22 प्रजातियां पाई जाती हैं। दुर्लभ प्रजाति के एक कछुए की कीमत अंतराष्ट्रीय बाजार में 3 से 4 हजार रुपये तक हो सकती है। जहां तक तालाब में अचानक कछुओं के मरने का मामला है तो यह प्रदूषण की वजह से ऑक्सीजन कम होने से भी हो सकता है। लेकिन, ऑक्सीजन कम होने से एक साथ सैकड़ों की तादाद में कछुओं की मौत नहीं होगी। मेरा मानना है कि एक साल सैकड़ों कछुओं की मौत की वजह तालाब में कोई कीटनाशक विषाक्त डाला जाना भी हो सकता है। अक्सर कछुओं की तस्करी करने वाले लोग ऐसा करते हैं। कछुओं के बेहोश होने पर इनको ले जाते हैं। दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीवों पर खतरा मंडरा रहा है। यह सभी लोग जानते हैं। -डॉ. इकबाल हबीब, वरिष्ठ जन्तु विज्ञानी

2009 में पकड़े गए थे चार कछुआ तस्कर
बदायूं। पुलिस ने अक्तूबर 2009 में वजीरगंज थाने की बगरैन चौकी इलाके में पुलिस ने दुर्लभ प्रजाति के 12 कछुओं के साथ चार तस्करों को गिरफ्तार किया था। यह सभी कछुए टेंट प्रजाति के थे। गौर करने वाली बात यह है कि उस समय भी तस्करों के चार साथी 90 कछुओं को लेकर फरार होने में कामयाब हो गए थे। अब तक पुलिस उनकी तलाश नहीं कर सकी है। गिरफ्तार तस्करों ने पुलिस को बताया था कि वह पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कछुओं की तस्तरी करते हैं। 

तेंदुआ को भी काबू नहीं कर सका था वन महकमा
बदायूं। मुजरिया थाने के गांव सिकंदराबाद में 18 अप्रैल 2016 को दुलर्भ प्रजाति का तेंदुआ पहुंच गया था। तेंदुआ ने हमला कर चार लोगों को घायल भी किया था। इसके बाद तंदुआ एक कुएं में गिर गया था। इसे पकडने के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के साथ दुधवा नेशनल पार्क से भी टीमों को बुलाया गया था। टीमों के पहुंचने से पहले ही वन विभाग की लापरवाही के चलते तेंदुआ निकल कर भाग गया था। इसके बाद भी कटरी के कई गांवों में तेंदुआ देखा गया। लेकिन, वन विभाग मनने को तैयार नहीं है।

इस बारे में जानकारी की जा रही है। अगर ऐसा हुआ है तो कछुओं के शव आईवीआरआई भेजकर पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पड़ताल की जाएगी कि आखिर कछुओं की मौत क्यों हुई है। मामले में कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। समीर कुमार, डीएफओ
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