कटरा सआदतगंज कांड में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट भले ही लगा दी है लेकिन लोगों के दिमाग में तमाम सवाल अब भी कौंध रहे हैं। पीड़ित परिवार कह रहे हैं कि सीबीआई उसके 12 और पुलिस आठ सवालों के जवाब दे तो वह संतुष्ट हो जाएंगे। 181 दिन बाद देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी ने गुरुवार को क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की थी, जिससे पीड़ित परिवार सहमत नहीं है। पीड़ित पक्ष की ओर से सीबीआई की क्लोजर रिपेार्ट के खिलाफ प्रोस्टेट देने की तैयारी शुरू कर दी गई है। मामले में अगली सुनवाई छह जनवरी को होनी है।
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद से ही पीड़ित परिवार और मुख्य गवाह सीबीआई पर हमलावर है। पीड़ित परिवार का कहना है कि सीबीआई ने आखिर बिना पोस्टमार्टम और लड़कियों के शव देखे बगैर रेप और हत्या की बात को खारिज कैसे कर दिया। लड़कियों के भाई ने कहा कि वह सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। स्पेशल जज (पाक्सो एक्ट) की कोर्ट में भी वह क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ प्रोस्टेट देंगे।
संदेह के घेरे में थी एफआईआर: सक्सेना
तत्कालीन एसएसपी अतुल सक्सेना ने माना है कि कटरा सआदतगंज कांड की एफआईआर की कहानी संदेह के घेरे में थी। उस समय बेवजह पूरे मामले को मीडिया ने तूल दे दिया था। इससे पुलिस दबाव में आ गई और बिना किसी जांच के पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करनी पड़ी। सक्सेना ने कहा कि पुलिस को पूरी कहानी पर संदेह था। सीबीआई जांच शुरू होने से पहले ही आरोपियों और लड़कियों के सैंपल जांच के लिए हैदराबाद स्थित फॉरेंसिक लैब भेज दिए गए थे।
बता दें कि कटरा सआदतगंज में चचेरी बहनों के शव 27/28 मई को पेड़ पर लटके मिले थे। मामले ने तूल पकड़ा तो शासन ने तत्कालीन प्रभारी डीएम उदयराज और एसएसपी अतुल सक्सेना को सात जून को सस्पेंड कर दिया था। बाद में इन दोनों की बहाली हो गई थी। अतुल सक्सेना इस समय संभल के एसएसपी हैं। यहां यह भी बताना जरूरी है कि आठ जून को सूबे के डीजीपी ने पूरे मामले को ऑनर किलिंग करार दिया था। हालांकि सीबीआई जांच का निष्कर्ष ऑनर किलिंग नहीं आत्महत्या निकला है।