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सिपाही की हत्या में पति-पत्नी समेत पांच पर मुकदमा

Fri, 19 Feb 2016 12:00 AM IST
बदायूं।
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बिल्सी थाने के गांव गड़ौली में डीजे बंद कराने पहुंचे सिपाही शहीम खान और भीमसेन पर जानलेवा हमला करने के दुस्साहसिक मामले में पुलिस ने जगतपाल, उसकी पत्नी कांता, दो बेटियों और एक बेटे के खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, बलवा आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। मुकदमा एसओ बिल्सी नरेंद्र सिंह की ओर से दर्ज कराया गया है। गुरुवार को डीआईजी आशुतोष कुमार ने गड़ौली पहुंच कर मौका मुआयना किया। फॉरेंसिक एक्सपर्ट ने भी यहां पहुंच कर क्लू खंगाले।
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बिल्सी थाने के गांव गड़ौली का जगतपाल शाक्य बुधवार रात अपने घर में तेज आवाज में डीजे बजा रहा था। गांव के लोगों ने गुरुवार से शुरू हो रही बोर्ड परीक्षा का हवाला देते हुए थाना पुलिस से शिकायत की थी। रात में ही बिल्सी थाने की रिसौली चौकी पर तैनात सिपाही शहीम खान और भीमसेन को गड़ौली भेजा गया। दोनों सिपाही जगतपाल के घर पहुंचे। इन्होंने डीजे बंद करने को कहा। सिपाही कुछ समझ पाते इससे पहले जगतपाल ने अपनी पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे के साथ मिलकर दोनों को घर में खींच लिया। दोनों सिपाहियों की रायफलें छीन लीं। बाद में कुल्हाड़ी और फावड़े से इन पर ताबड़तोड़ प्रहार किए थे। वारदात को अंजाम देकर जगतपाल परिवार के साथ घर से निकल गया था। करीब आधा घंटा तक दोनों घायल सिपाही वहीं पड़े तड़पते रहे। बाद में गांव वालों की खबर पर पहुंचे एसओ बिल्सी नरेंद्र सिंह ने इनको अस्पताल भेजा। यहां से दोनों को बरेली रेफर कर दिया गया। देर रात शहीम खान ने बरेली के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया था।
गुरुवार को डीआईजी बरेजी रेंज आशुतोष कुमार ने एसएसपी सौमित्र यादव, एसपी देहात मुन्ना लाल के साथ गड़ौली पहुंच कर मौका मुआयना किया। घटना के संबंध में गांव वालों से भी बात की। डीआईजी ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं।
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दहशत का माहौल, पड़ोसी भी छोड़ गए घर
बदायूं। घटना के बाद गड़ौली गांव में दहशत का माहौल है। पूरा गांव छावनी में तब्दील कर दिया गया है। जगतपाल अपने परिवार के साथ पहले ही भाग चुका है। पुलिस पूछताछ और डर की वजह से जगतपाल के घर के आसपास के लोग भी अपने घरों को बंद करके चले गए हैं। गुरुवार को गांव में ज्यादातर लोग अपने घरों से नहीं निकले।

पुलिस खंगालती रही ईखें, जगतपाल उत्तराखंड पहुंचा
घटना के बाद आया बदायूं, एसओजी का काशीपुर में डेरा
करीबियों और रिश्तेदारों के फोन लगाए सर्विलांस पर
रजनीश पांडेय रिंकू
बदायूं। डीजे बंद कराने के विरोध में सिपाहियों पर हमला कर एक सिपाही शहीम की हत्या के आरोपी शहीम की तलाश में पुलिस गांव के जंगल और ईखों को खंगालती रही। इस दौरान जगतपाल बेखौफ होकर अपने अपने परिवार के साथ बदायूं आया। बाद में यहां से उत्तराखंड के लिए रवाना हो गया। मोबाइल सर्विलांस के जरिए एसओजी ने उसकी लोकेशन ट्रेस कर ली है। एसओजी की एक टीम ने भी काशीपुर में डेरा जमा लिया है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
बुधवार रात घटना के बाद ही पुलिस ने गांव वालों से जगतपाल का वह नंबर जुटा लिया था जिसका वह इस्तेमाल कर रहा था। एसओजी ने इसे सर्विलांस पर लगा दिया। गुरुवार सुबह उसकी लोकेशन उत्तराखंड में काशीपुर के आस-पास मिलने के बाद एसओजी टीम काशीपुर रवाना हो गई है। सर्विलांस के जरिए एसओजी को यह भी पता लगा है कि घटना के बाद जगतपाल की लोकेशन लगातार बदलती रही। बदायूं में भी उसका नंबर कई मोबाइल टॉवर से कनेक्ट हुआ था। लोकेशन के आधार पर एसओजी की एक टीम सर्विलांस एक्सपर्ट के साथ उत्तराखंड के काशीपुर पहुंच गई है। सूत्रों की मानें तो जगतपाल के करीबियों के साथ नाते-रिश्तेदारों के मोबाइल फोन भी सर्विलांस पर लगाकर ट्रेस किए जा रहे हैं।

सोचने का मौका दिए बिना करता था हमला
बदायूं। जगतपाल के सिरफिरेपन का  अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह सामने वाले को सोचने का मौका तक नहीं  देता था। इससे पहले ही हमलावर हो जाता था। सिपाही भीमसेन और शहीम खान के  साथ भी यही हुआ। इससे पहले वह कुछ समझ पाते जगतपाल ने अपने परिवार के साथ  मिलकर दोनों को घर में खींच लिया और रायफलें छीनने के बाद कातिलाना हमला कर  दिया।

किसी से नहीं रखता था कोई सरोकार
बिल्सी। जगतपाल पूरी तरह से सिरफिरा  था। वह किसी से कोई सरोकार नहीं रखता था। न तो किसी के घर जाता था और न  किसी को अपने घर बुलाता था। डीजे का उसे शौक था। इसके लिए उसने एक ट्रक का  बैट्रा भी खरीद रखा था। बिजली न आने पर वह बैट्रा से डीजे बजाता था।

डीआईजी ने की ग्राम प्रधान से बात
बिल्सी। डीआईजी आशुतोष कुमार ने ग्राम प्रधान मुन्ना सिंह चौहान से भी बात करके जानकारी जुटाई। उन्होंने एसएसपी सौमित्र यादव को आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए।

जगतपाल की दबंगई से परेशान थे पड़ोसी
फोटो-
बिल्सी। गड़ौली के पूर्व प्रधान श्रीकृष्ण शाक्य की मानें तो जगतपाल सिरफिरा था। पूरा गांव उसकी दबंगई से परेशान था। अक्सर वह लोगों से मारपीट करता था। कई पड़ोसियों ने तो जगतपाल के डर से अपना घर भी छोड़ दिया था।

कभी नहीं होता था अपने परिवार से अलग
बिल्सी। ग्राम प्रधान मुन्ना सिंह चौहान की मानें तो जगतपाल कभी अपने परिवार से अलग नहीं होता था। वह अगर कहीं जाता भी था तो अपनी पत्नी और बच्चों को साथ ले जाया करता था। उसके सिरफिरे स्वभाव की वजह से गांव के लोग उससे सरोकार नहीं रखते थे।

लोहे के तार में करंट से करता था घर की सुरक्षा
बिल्सी। जगतपाल के घर में मेन गेट पर दरवाजा नहीं था। यहां उसने लोहे के तार बांध रखे थे। इन तारों में वह करंट छोड़ देता था। कई बार गांव के लोगों को करंट लग भी चुका है। उसके डर की वजह से कोई विरोध नहीं करता था। डीआईजी के सामने जब गांव के लोगों ने यह बात बताई तो डीआईजी आशुतोष कुमार भी दंग रह गए।

इन धाराओं में दर्ज किया गया मुकदमा
147- बलवा करना, 148- हथियारों के प्रदर्शन के साथ बलवा करना, 149- विधि के विरुद्व जमाबड़ा, 333- लोक सेवक को भयभीत करके चोट पहुंचाना, 353- सरकारी काम में वाधा पहुंचाना, 307- हत्या की कोशिश करना, 302- हत्या करना, 34- गलत नीयत रखना

इस हिमाकत के पीछे वजह कुछ और...
सिर्फ डीजे बंद कराने की बात नहीं उतर रही गले
सिपाही शहीम पर किए गए थे ताबड़तोड़ वार
गहराई से पड़ताल की जाए तो सच आएगा सामने
बलराम शर्मा
बदायूं। कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, कोई यूं ही बेवफा नहीं होता...सिपाहियों पर हुए कातिलाना हमले के पीछे सिर्फ डीजे बंद कराने की बात कहना ही मुख्य वजह रही? ये बात लोगों को हैरान कर रही है। इतनी सी बात पर पूरा परिवार इस कदर मरने-मारने पर आमादा हो जाए? ये अविश्वसनीय सी बात है। हालांकि पुलिस अफसर यही कह रहे हैं, लेकिन अंदरूनी सच और ही कुछ है।  
बिल्सी के गांव गढ़ौली में बुधवार की रात जो कुछ हुआ, वह अप्रत्याशित था। सुबह अखबारों में जगतपाल शाक्य और उसके परिवार की हिमाकत को पढ़कर सब हैरान थे। किसी को ये विश्वास नहीं हो रहा था कि गांव का एक साधारण सा आदमी इतना बड़ा कांड कर देगा। लोगों का कहना था कि जरूर कोई ना कोई ऐसी बात हुई होगी, जिस पर जगतपाल ही नहीं उसके परिवार का खून खौल उठा और फिर उन्होंने दोनों सिपाहियों को अंदर खींचकर बेरहमी से कुल्हाड़ी-फावड़े से तब तक बार वार किए जब तक वो मरणासन्न नहीं हो गए। घर के अंदर के हालात भी हमले की क्रूरता को बयां कर रहे थे।
गांव वालों की मानें तो जगतपाल दबंग प्रवृत्ति का तो था, लेकिन वह बगैर बात किसी से भिड़ता भी नहीं था। जब उससे कोई भिड़ने की कोशिश करता, तभी वह आक्रामक होता था। जहां तक डीजे बजाने का सवाल है, तो वह रोजाना शाम को बजाता था। अगर ये मान भी लें कि सिपाही शहीम और भीमसेन ने उसके घर जाकर उससे डीजे बंद कराने को कहा, तो इतनी सी बात पर जगतपाल का हमलावर हो जाना किसी के गले नहीं उतर रहा। मौके पर जरूर कोई ऐसी बात हुई, जिससे जगतपाल और उसके परिवार ने इस हद तक जाने की हिमाकत की।
अगर गंभीरता से इसकी पड़ताल की जाए तो सच सामने आ जाएगा। परिवार के निशाने पर सिपाही शहीम रहा, उस पर अधिक वार किए गए। बाद में उसने बरेली में दम तोड़ दिया था। अफसर भी पशोपेश में हैं। वह हकीकत जानने के लिए आरोपी की गिरफ्तारी और घायल सिपाही भीमसेन की हालत में  सुधार का इंतजार कर रहे हैं। एसएसपी सौमित्र यादव कहते हैं कि भीमसेन की  हालत में सुधार का इंतजार किया जा रहा है। जगतपाल के कुछ रिश्तेदारों से भी  पूछताछ हो रही है।
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