प्रसव के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र समरेर पर आई प्रसूता की मौत होने से ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। दो बार बरेली मार्ग पर जाम लगा दिया, लेकिन पुलिस ने प्रयास करके खुलवा दिया। स्वास्थ्य विभाग के अपर निदेशक भी आए, वे भीड़ का रुख देखकर अस्पताल के स्टाफ की तरह खिसक लिए। मृतका के पति ने स्टाफ नर्स पर गलत इंजेक्शन लगाने की लिखित शिकायत अपर निदेशक को पत्र भेजकर की है। करीब आठ घंटे की गहमा-गहमी के बाद परिवारीजन अस्पताल से शव उठाकर ले गए।
बुधवार को प्रात: छह बजे गांव का ही वीरपाल अपनी गर्भवती पत्नी उर्मिला (28) को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र समरेर पर आया। प्रसव पीड़ा को देख वहां मौजूद स्टाफ नर्स ने उर्मिला को एक इंजेक्शन लगा दिया। हालांकि उर्मिला इंजेक्शन को मना करती रही कि उसे इंजेक्शन सूट नहीं करता है। इसके बाद भी उसे इंजेक्शन लगा दिया। आरोप है कि इंजेक्शन लगते ही उर्मिला बेहोश हो गई। हालांकि वो घर से पैदल चलकर स्वास्थ्य केंद्र पर परिजनों के साथ आई थी। नर्स ने बच्चा उलझा हुआ बताकर उसे बदायूं ले जाने की बात कही। इस पर परिजन उर्मिला को बदायूं लेकर आए।
महिला अस्पताल में देखते ही डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन शव लेकर समरेर अस्पताल आ गए। उनका आरोप था कि समरेर अस्पताल की स्टाफ नर्स गलत इंजेक्शन दे दिया। इसकी वजह से उर्मिला की मौत हुई है। कुछ ही देर में वहां पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई। बरेली रोड पर जाम लगा दिया। सूचना पर चौकी इंचार्ज राकेश चौहान मौके पर आ गए। उन्होंने लोगों को समझाकर मामला शांत कराया। परिजन शव उठाकर ले जाने को तैयार हो गए, लेकिन इसी बीच पुलिस ने रिपोर्ट लिखने से इंकार कर दिया। तभी गांव वाले दुबारा आंदोलित हो गए और फिर जाम लगा दिया। कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। कोतवाल जेके तोमर ने नियम का हवाला देते हुए लोगों को समझाया तो जाम खोल दिया, लेकिन शव अस्पताल परिसर में ही रखकर लोग वहीं डटे रहे।
लिखकर दें शिकायत होगी जांच:एडी
सूचना मिलने पर अपर निदेशक स्वास्थ्य (एडी) सुबोध शर्मा भी समरेर अस्पताल आ गए। उन्होंने मृतका के पति वीरपाल से कहा कि आप को जो शिकायत है लिखकर दे दें। जांच होगी यदि स्टाफ नर्स की गलती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
यूं खिसके एडी
एडी के कहने पर वीरपाल ने शिकायत लिखकर दे दी। इसी बीच तमाम लोग आ गए और उन्होंने डॉक्टर समेत समस्त स्टाफ पर आरोपों की बौछार कर दी। लोगों का आक्रोश देखकर स्टाफ के लोग एक-एक करके अस्पताल के पिछले भाग से खिसक लिए। यह देखकर एडी भी जांच के बहाने वहां से निकल लिए।
अस्पताल कर्मियों को खोजती रही भीड़
एडी के पहुंचने के बाद यहां पर भीड़ और भी ज्यादा बढ गई थी। गुस्साई भीड़ काफी देर तक सभी स्वास्थ्य कर्मियों को तलाशती रही। लेकिन कोई दिखाई नहीं पड़ा।
काम आया बेहतर व्यवहार
अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर क्षेत्र की जनता में यूं तो पहले से ही आक्रोश पनप रहा था। इस घटना ने आग में घी का काम कर दिया। लेकिन पुलिस और बाद में एडी के व्यवहार ने लोगों का गुस्सा काफी हद तक शांत कर दिया। भीड़ में इतना गुस्सा था कि वहां तोड़फोड़ जैसी कोई भी घटना हो सकती थी।