गंभीर मामलों में भी डॉक्टर संजीदा नहीं दिखते। पोस्टमार्टम के बाद गंभीर मामलों में विसरा प्रिजर्व कर इनको उलझाने का काम किया जा रहा है। जिला जेल के बंदी शिवनंदन की अस्पताल में मौत को भी डॉक्टरों ने उलझा दिया है। गौर करने वाली बात यह है कि चार स्पेशलिस्ट डॉक्टर भी मौत की वजह नहीं बता सके। शिवनंदन का विसरा भी बाकी मामलों की तहर प्रिजर्व कर दिया गया।
हत्या के मामले में जिला जेल में बंद शिवनंदन (27) पुत्र करन सिंह की रविवार रात अचानक हालत बिगड़ गई थी। उसे अस्पताल लाया गया। यहां उसकी मौत हो गई। सोमवार को चार डॉक्टर के पैनल ने शिवनंदन का पोस्टमार्टम किया। पैनल में वरिष्ठ सर्जन डॉ. आरएस यादव, फिजीशियन डॉ. आंशू अग्रवाल, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एके गुप्ता और नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ. एमए सिद्दीकी को शामिल किया गया है। यह सभी जिला अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। पोस्टमार्टम के बाद डॉक्टरों को शिवनंदन की मौत की वजह तलाशनी थी।
गौर करने वाली बात यह है कि चारों विशेषज्ञ डॉक्टर इसमें फेल हो गए। शिवनंदन का विसरा प्रिजर्व कर मामले को उलझा दिया गया। जानकारों की मानें तो ऐसा बहुत कम ही संभव है कि मौत की वजह साफ न हो। मरने वाला युवा था, बिना किसी वजह के उसकी मौत हो ही नहीं सकती। पैनल में सबसे वरिष्ठ डॉ. आरएस यादव ने बताया कि काफी माथापच्ची करने के बाद भी मौत की वजह समझ में न आने पर ही विसरा प्रिजर्व किया गया है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट के बाद ही वजह साफ हो सकेगी।
इधर, फारेंसिक एक्सपर्ट डॉ. राजेश वर्मा का कहना है कि ज्यादातर मामलों में एक ही डॉक्टर मौत की वजह बता देता है। इस मामले में ऐसा क्यों हुआ इस बारे में वह कुछ नहीं कह सकते। वीडियोग्राफी भी कराई गई है। इससे काफी कुछ साफ हो सकता है।