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दुष्कर्म पीड़िता पक्ष के चार  लोगों पर रेप का मुकदमा

Sat, 24 Sep 2016 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बदायूूं।
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Rape - फोटो : Demo Pic
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पेशबंदी में पीड़िता के दो मामा को भी बनाया आरोपी
अपहरण के बाद किशोरी के साथ किया गया था दुष्कर्म
 पेशबंदी और दबाव बनाने के लिए बलात्कार का आरोप हथियार बन गया है। पुलिस अधिकारी भी चूक कर देते हैं। इसी तरह का एक मामला शहर में सामने आया है। शहर के एक मोहल्ले की 16 वर्षीय किशोरी को अगवा करने के बाद दो लोगों ने उससे दुष्कर्म किया था। किशोरी अपने मामा के घर आई हुई थी। उसके मामा ने चार लोगों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने किशोरी को बरामद कर दो आरोपी जेल भेज दिए थे। अब जेल भेजे गए एक आरोपी की मां ने पेशबंदी में किशोरी के दो मामा के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करा दिया है। 
शहर के एक मोहल्ले में 16 वर्षीय किशोरी अपनी ननिहाल आई थी। मोहल्ले के ही चार युवकों ने उसे अगवा कर लिया। उसे दिल्ली ले गए। कई दिन तक उससे दुष्कर्म किया। किशोरी के मामा ने चार अगस्त को रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आरोपियों के जेल जाने के बाद एक आरोपी की मां ने दो सितंबर को किशोरी के दो मामा समेत चार लोगों पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए तहरीर दी और सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया। उसने घटना 22 मई को होना बताई। इस तहरीर के आधार पर कोतवाली पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कर ली। 
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यहां गौर करने वाली बात यह है कि किशोरी और आरोपी पक्ष के बीच 15 मई को मारपीट हुई थी। मामले में एनसीआर भी दर्ज कराई गई। इसके बाद दोनों पक्षों ने कोतवाली में पुलिस के सामने लिखित समझौता कर लिया। उस वक्त आरोपी पक्ष की ओर से दी गई तहरीर में दुष्कर्म जैसी किसी बात का जिक्र नहीं किया गया था। जाहिर सी बात है कि आरोपी पक्ष ने पेशबंदी के लिए दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करा दिया। पुलिस ने भी पड़ताल की जरूरत नहीं समझी। अब किशोरी पक्ष के लोग अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। 
 
आरोपी पक्ष बना रहा फैसले का दबाव
बदायूं। किशोरी पक्ष का आरोप है कि आरोपी उन पर फैसले का दबाव बना रहे हैं। आरोप लगाने वाली महिला कह रही है कि अगर वह मुकदमा वापस ले लें तो वह भी केस को वापस ले लेगी। ऐसे में पूरा परिवार परेशान है। बार-बार शिकायत के बाद भी पुलिस मामले में कार्रवाई नहीं कर रही।
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दोनों मामलों में जांच की जा रही है। अगर मुकदमा पेशबंदी में दर्ज कराया गया है तो विवेचना में साफ हो जाएगा। किसी बेकसूर को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
-आनंद कुमार पांडेय, सीओ सिटी 
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