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पांच हजार का इनामी डबल  मर्डर का आरोपी गिरफ्तार

Wed, 03 May 2017 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अलापुर (बदायूं)।
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कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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एसओजी, पुलिस ने अलापुर से दबोचा, कोर्ट ने जेल भेजा
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मामले में पिता और ताऊ को फांसी और दो भाइयों को उम्रकैद 
 फरार चल रहे डबल मर्डर के आरोपी और पांच हजार रुपये के इनामी विकास भारद्वाज को एसओजी और पुलिस की टीम ने बुधवार को अलापुर से गिरफ्तार कर लिया। बुधवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया। यहां से कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया। विकास भारद्वाज के दो भाई, पिता और ताऊ पहले से जेल में हैं। इन सभी को डबल मर्डर में सजा हो चुकी है।
करीब 12 साल पहले म्याऊं ब्लॉक परिसर में सहकारी समिति के संचालक पद के लिए नामांकन के दौरान अलापुर थाने के गांव कोड़ा गूजर निवासी अरवेंद्र पुत्र माधोराम और अशोक पुत्र पुत्तू लाल की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। माधवराम ने पतांजलि , वशिष्ठ, विकास, राहुल और वरुण भारद्वाज के खिलाफ हत्या, बलवा, हत्या का प्रयास और दलित उत्पीड़न की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। दोहरे हत्याकांड के मामले में स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट शैलेश्वर नाथ सिंह ने नौ दिसंबर 2014 को पतांजलि भारद्वाज, वशिष्ठ भारद्वाज को फांसी की सजा सुनाई थी। वरुण और राहुल को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। विकास जमानत पर रिहा होने के बाद फरार चल रहा था। कोर्ट ने उसके खिलाफ वारंट जारी किए थे।
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बुधवार सुबह पुलिस को मुखबिर से खबर मिली कि विकास भारद्वाज अलापुर में ही है। एसओजी प्रभारी इंस्पेक्टर राम गोपाल शर्मा, इंस्पेक्टर अलापुर अतुल प्रधान, दरोगा हरपाल सिंह, सिपाही रामाधार, राजेश महिला सिपाही भावना और एसओजी सब इंस्पेक्टर संदीप तोमर, कांस्टेबल सुधीर कुमार, दिनेश कुमार दबिश देकर पांच हजार रुपये के इनामी विकास भारद्वाज को गिरफ्तार कर लिया।
 
फरारी के चलते नहीं हो सकी सजा 
 दोहरे हत्याकांड के मामले में विकास फरार चल रहा था। ऐसे में उसे सजा नहीं सुनाई जा सकी थी। वाकया आठ जनवरी 2008 का है। जब म्याऊं ब्लॉक परिसर फायरिंग की तड़तड़ाहट से गूंज उठा था। यहां दलित चचेरे-तहेरे भाइयों अशोक (28) पुत्र पुत्तू लाल और अरवेंद्र (27) पुत्र माधोराम की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने पतांजलि, उनके भाई वशिष्ठ और पतांजलि के तीन बेटों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जमानत मिलने के बाद विकास भारद्वाज फरार चल रहा था। उस पर पांच हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। तीनों भाइयों में विकास सबसे बड़ा है। दो साल से पुलिस विकास की तलाश में लगी हुई थी। आखिरकार पुलिस और एसओजी ने मंगलवार रात विकास भारद्वाज को अलापुर स्थित उसके घर से ही दबोच लिया।
 
सजा सुनाते वक्त कोर्ट ने की थी सख्त टिप्पणी
स्पेशल जज ने मामले में सजा सुनाते वक्त काफी सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि सहकारी समिति के संचालक पद के निर्वाचन के नामांकन के लिए आने वाले प्रत्याशियों को रोकना, उनसे अभद्र व्यवहार कर अपशब्द कहना, मारपीट करना और लोकतंत्र के पवित्र पर्व पर दिनदहाड़े दो दलित उम्मीदवारों पर कातिलाना हमला कर उनकी हत्या करने की मंशा जनता में भय, आतंक और दहशत का माहौल पैदा करना रही है। दोषियों ने ऐसा कर लोकतंत्र के पवित्र उद्देश्य और भावना से खिलवाड़ किया है। कोर्ट ने कहा कि दिनदहाड़े जघन्य तरीके से अंजाम दी गई घटना पूरे समाज को व्यथित करने वाली है। पतांजलि और उसके भाई वशिष्ठ का जुर्म विरलतम श्रेणी में आता है। ऐसे में इन दोनों को मौत की सजा के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।
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युवा होने की वजह से फांसी से बच गए थे दो आरोपी
 युवा होने की वजह से डबल मर्डर के आरोपी राहुल और वरुण फांसी की सजा से बच गए थे। कोर्ट ने कहा था कि राहुल (32) और वरुण (26) युवा हैं। दोनों ने आपराधिक प्रवृत्ति के पिता और चाचा की तरह आपराधिक जीवन अपना लिया। दोनों हिस्ट्रीशीटर बन गए। आरोपी वरुण रेप के मामले का सजायाफ्ता है। बावजूद इसके इन दोनों की आयु को देखते हुए उनमें सुधार की संभावना है। इसलिए राहुल और वरुण को उम्रकैद की सजा सुनाई जाती है।
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